देश की खबरें | भारतीय रेल की सुरक्षा, संरक्षा के लिए आवधिक ऑडिट आवश्यक : अदालत

नयी दिल्ली, 27 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि यात्रियों की सुरक्षा और संरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है और रेलवे को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा मानकों की नियमित जांच हो।

वकील कुश कालरा द्वारा दायर एक याचिका का निपटारा करते हुए उच्च न्यायालय ने यह आदेश पारित किया। याचिका में देश के सभी रेलवे स्टेशनों पर सामान की जांच करने के लिये ‘स्कैनर, हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर और सीसीटीवी कैमरे’ जैसे सुरक्षा उपायों और ट्रेनों में टक्कर-रोधी उपकरण लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

प्रशासन द्वारा सुरक्षा और संरक्षा की दिशा में उठाए गए कदमों पर संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि भारतीय रेल हर संभव कदम उठा रहा है ताकि इस संबंध में कोई चूक ना हो।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चन्द्र शर्मा और न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने कहा, ‘‘(केन्द्र द्वारा दायर) हलफनामे में बताया गया है कि रेलवे ने सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं, सामान की जांच के लिये स्कैनर, धातु का पता लगाने के लिए मेटल डिटेक्टर दरवाजे, हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर, शरीर में पहने जाने वाले कैमरे और खोजी कुत्तों, स्वचालित ट्रेन संरक्षा प्रणाली आदि लगाए हैं।’’

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘भारत सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे के आलोक में और किसी चीज की जरूरत नहीं है, इसलिए वर्तमान जनहित याचिका का निपटारा किया जाता है। लेकिन, प्रतिवादी (रेलवे) सुनिश्चित करें कि भारतीय रेलवे में सुरक्षा और संरक्षा मानदंडों का सावधिक ऑडिट हो। सावधिक ऑडिट करने और स्थिति की समीक्षा के बाद भारत सरकार देश के सभी रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा एवं संरक्षा के उच्चतम मानदंडों को बनाए रखना सुनिश्चित करे।’’

कालरा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि देश के ज्यादातर रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा एवं संरक्षा उपायों की कमी है।

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