गांधीनगर, एक दिसंबर नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने शुक्रवार को कहा कि विकसित देशो में प्रति व्यक्ति ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन वैश्विक औसत का दोगुना या तीन गुना है और इसे कम किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस समय जारी संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन या सीओपी28 में इस पर चर्चा की जानी चाहिए। उन्होंने भारत द्वारा चरणबद्ध तरीके से कोयला आधारित ऊर्जा संयंत्रों को बंद करने के मुद्दे को ‘विकास विरोधी ताकतों’ का ‘ध्यान हटाने की चाल वाला विषय’ करार दिया।
‘एनर्जी ट्रांजीशन इन इंडिया-रोड ट्रैवेल्ड एंड अपॉर्च्युनिटीज अहेड’ (भारत में ऊर्जा प्रणाली का परिवर्तन-अब तक का सफर और आगे के अवसर) पर केंद्रित एक सम्मेलन से इतर संवाददाताओं से बातचीत में सिंह ने कहा कि भारत प्रति व्यक्ति ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन के लिहाज से दुनिया के उन देशो में शामिल है जहां यह उत्सर्जन बहुत कम है।
सिंह ने कहा, ‘‘हमारे देश में प्रति व्यक्ति सालाना उत्सर्जन 2.19 टन है जो दुनियाभर में उत्सर्जन के सबसे कम आंकड़ों में से एक है, इसके विपरीत वैश्विक औसत 6.8 है। हम इकलौते देश हैं जिसने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) को नौ साल पहले ही हासिल कर लिया है। हमने संकल्प लिया था कि 2030 तक वर्ष 2005 के स्तर के मुकाबले ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में 33 फीसदी तक कमी कर देंगे, लेकिन हमने यह लक्ष्य वर्ष 2019 में ही हासिल कर लिया।’’
उन्होंने कहा कि भारत ने संकल्प लिया था कि 2030 तक 40 फीसदी बिजली का उत्पादन गैर जीवाश्म ईंधन से होगा, लेकिन इस लक्ष्य को समय से पहले हासिल कर लिया गया और फिलहाल देश में गैर जीवाश्म ईंधन से उत्पादित बिजली का योगदान 43 फीसदी है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी फिलहाल सीओपी28 की बैठक में भाग ले रहे हैं।
सिंह ने कहा कि वैश्विक औसत 6.8 फीसदी है, लेकिन कुछ देशों में प्रति व्यक्ति सालाना ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन 15 टन है।
सिंह ने कहा कि यदि औद्योगिक काल के पूर्व के स्तर के मुकाबले तापमान में वैश्विक वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना है, तो इसके लिए उपलब्ध ‘कार्बन स्पेस’ 250 गीगा टन या छह टन प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष है।
मंत्री ने कहा कि यदि भारत स्वच्छ ऊर्जा की 24 घंटे आपूर्ति करना चाहता है तो परमाणु ऊर्जा उत्पादन की उच्च क्षमता का होना अहम है। उन्होंने कहा कि देश में परमाणु ऊर्जा उत्पादन की 7000 मेगावाट की स्थापित क्षमता है, लेकिन जल्द ही इसमें 15,000 मेगावाट का इजाफा किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हम इसे बढ़ाकर 50,000 से 60,000 मेगावाट या 1,00,000 मेगावाट तक करना चाहते हैं।’’
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