नयी दिल्ली, 24 जुलाई दिल्ली में कोविड-19 मरीजों के लिए प्लाजा दान करने को लेकर फोन पर संपर्क किए जाने पर लोग बेहद उदासीन रवैया प्रदर्शित कर हैं। निराधार आशंकाओं और अंजाने भय के चलते लोग प्लाजा दान करने से कतरा रहे हैं। डॉक्टरों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
कोविड-19 मरीजों के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी के उपयोग से बेहतर नतीजे सामने आए हैं।
डॉक्टरों ने इसके लिए स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में निराधार आशंकाओं और भविष्य में अपने किसी पारिवारिक सदस्य को रक्त प्लाज्मा की आवश्यकता होने पर ही दान करने की सोच को जिम्मेदार ठहराया।
अधिकारियों के मुताबिक, दो जुलाई से शुरू हुए अभियान के तहत दिल्ली में अब तक केवल 320 लोगों ने प्लाज्मा दान किया है जबकि 23 जुलाई तक करीब 1,00,000 से अधिक कोविड-19 मरीज संक्रमणमुक्त हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को कहा था कि सरकार प्लाज्मा निशुल्क उपलब्ध कराएगी और लोगों को इसे खरीदने-बेचने की जरूरत नहीं है।
मुख्यमंत्री और सरकार के अन्य वरिष्ठ सदस्य लगातार संक्रमणमुक्त हुए लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे कोरोना वायरस संक्रमण से जूझ रहे मरीजों के लिए अपना रक्त प्लाज्मा दान करें।
हालांकि, देश के पहले प्लाज्मा बैंक से किए जा रहे फोन कॉल के बाद प्रतिक्रिया उत्साहजनक नहीं है।
दो जुलाई को केजरीवाल ने आईएलबीएस में प्लाज्मा बैंक का उद्घाटन किया था। दिल्ली का दूसरा प्लाज्मा बैंक करीब सप्ताह भर पहले ही लोकनायक जय प्रकाश अस्पताल (एलएनजेपी) में शुरू किया गया था।
अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई- से कहा, '' आईएलबीएस में, उद्घाटन वाले दिन 10 प्लाज्मा दानकर्ता आए थे, जिनमें से अधिकतर अस्पताल के कर्मचारी थे जोकि इस बीमारी से ठीक हुए थे। अब रोजाना औसतन करीब 15 दानकर्ता आ रहे हैं जिसके तहत आज की तारीख तक करीब 300 लोगों ने प्लाज्मा दान किया है।''
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