जम्मू, 22 मार्च राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने के मामले में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेता वहीद उर रहमान पर्रा और दो अन्य लोगों के खिलाफ सोमवार को आरोपपत्र दाखिल किया तथा कहा कि युवा नेता की जम्मू-कश्मीर में ‘‘राजनीतिक-अलगाववादी-आतंकी’’ गठजोड़ को बनाए रखने में अहम भूमिका थी।
एनआईए के एक प्रवक्ता ने बताया कि पर्रा के अलावा शाहीन अहमद लोन और तफजुल हुसैन परिमू के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किया गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, ये दोनों लोग आतंकवादियों के लिए नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार से हथियार और पाकिस्तान में बैठे आकाओं के इशारे पर आतंकी गतिविधियां करने के लिए धन मुहैया कराने में शामिल थे।
उन्होंने बताया कि एनआईए ने डीएसपी दविंदर सिंह मामले में यहां एक विशेष अदालत में तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की धाराओं 17, 18, 38, 39 एवं 40, शस्त्र कानून की धारा 25 (1एए) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा छह के तहत पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है।
सिंह को पुलिस ने आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडरों-सैयद नवीद मुश्ताक उर्फ ‘नवीद बाबू’ और रफी अहमद राथर तथा वकील इरफान शफी मीर के साथ 11 जनवरी, 2020 को उस समय गिरफ्तार किया था, जब वे श्रीनगर से जम्मू जा रहे थे।
एनआईए ने मामले को 17 जनवरी को पुन: दर्ज किया था और जांच अपने हाथ में ले ली थी। उसने इस मामले में छह जुलाई को आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के निकट सहयोगी पर्रा को एनआईए ने पिछले साल 25 नवंबर को इस मामले में गिरफ्तार किया था।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘जांच से पता चलता है कि आरोपपत्र में आरोपी बनाया गया पर्रा हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों को धन स्थानांतरित करने और उनके लिए धन एकत्र करने संबंधी षड्यंत्र में शामिल था, ताकि आतंकवादी गतिविधियों के लिए सामान खरीदा जा सके। जम्मू-कश्मीर में ‘राजनीतिक-अलगाववादी-आतंकी’ गठजोड़ बनाए रखने में भी उसकी अहम भूमिका थी।’’
उन्होंने लोन और परिमू के बारे में बताया कि जांच में पता चला है कि आरोपपत्र में आरोपी बनाए गए ये लोग हिज्बुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के आतकंवादियों के लिए नियंत्रण रेखा के पार से हथियारों का प्रबंध करने में शामिल थे और वे पाकिस्तान में बैठे आकाओं के इशारे पर जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियां करने के लिए आतंकवादियों को धन भी मुहैया कराते थे।
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