भुवनेश्वर/बारिपदा, 12 अगस्त ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के गृह जिले मयूरभंज के करीब एक घंटे के दौरे के दौरान सुवर्णरेखा और देव सिंचाई परियोजनाओं का उद्घाटन किया और आदिवासियों को लुभाने की कोशिश की।
पटनायक के मयूरभंज दौरे को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मुकाबला करने की बीजद की रणनीति माना जा रहा है, जो मुर्मू के देश के शीर्ष संवैधानिक पद पर निर्वाचित होने का लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
भाजपा कथित तौर पर राज्य के लोगों के बीच यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिशों के चलते शीर्ष पद पर आसीन हुईं।
बीजद ने भी मुर्मू का राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन किया था।
उन्होंने इस मौके पर कहा कि आदिवासियों के साथ समन्वय की वजह से राज्य की बीजू जनता दल (बीजद) सरकार कई कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में सफल रही।
पटनायक ने जनसभा के दौरान कहा, ‘‘आदिवासियों के लिये शिक्षा और रोजगार योजनाओं के माध्यम से राज्य प्रगति कर सकता है।’’
पटनायक ने अपने भाषण में कहा कि आदिवासी बच्चे अपनी प्रतिभा की बदौलत नाम कमा रहे हैं और यह राज्य सरकार की शिक्षा, जीविकोपार्जन और कौशल विकास की विभिन्न योजनाओं से संभव हुआ।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ‘5टी’ पहल की वजह से मयूरभंज जिले के छात्रों के लिए विश्वस्तरीय शिक्षा उनके अपने गांव के स्कूल में प्राप्त करना संभव हुआ है।पटनायक ने कहा, ‘‘ये बदलाव न केवल विद्यार्थियों के लिए है बल्कि जिले और पूरे राज्य के लिए है।’’
गौरतलब है कि ‘5टी’पहल के तहत राज्य के दूरदराज के गांवों के स्कूलों में ही स्मार्ट कक्षा, पुस्तकालय, कंप्यूटर शिक्षा और खेल के मैदान की सुविधा मुहैया कराई जाती है।
मयूरभंज जिले की कला संस्कृति और आदिवासी परंपरा की चर्चा करते हुए पटनायक ने कहा, ‘‘मैं पंडित रघुनाथ मुर्मू की धरती को नमन करता हूं। इस समृद्ध परंपरा ने मयूरभंज को देश में पहचान दी है। इसी मिट्टी की बेटी द्रौपदी मुर्मू ने मयूरभंज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को और समृद्ध किया है। हमें उनपर गर्व है।’’
मयूरभंज को भाजपा का गढ़ माना जाता है, जहां की नौ विधानसभा सीट में से छह पर उसके प्रत्याशियों की जीत हुई थी। इसके अलावा लोकसभा सीट भी भाजपा के खाते में गई थी।
हालांकि, उस समय राजनीतिक समीकरण बदल गए जब बीजद ने जिला परिषद चुनाव में 56 में से 53 सीटों पर जीत दर्ज की।
पटनायक के संक्षिप्त मयूरभंज दौरे ने उन्हें भाजपा इकाई के निशाने पर ला दिया है। ओडिशा के मयूरभंज जिला भाजपा इकाई के अध्यक्ष कंद्रा सोरेन ने आरोप लगाया कि बीजद सरकार लगातार जिले के आदिवासी बहुल इलाकों को नजर अंदाज कर रही है और चुनावों के दौरान लोगों से किए गए वादों को पूरा नहीं कर रही है।
सोरेन ने यहां जारी बयान में कहा कि वर्ष 2009 के नगर निकाय चुनाव में पटनायक ने बारिपदा शहर के लोगों से बुधाबलंगा नदी के किनारे-किनारे रिंग रोड बनाने का वादा किया था, लेकिन अबतक इसे पूरा नहीं किया गया और लोगों को बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है।’’
उन्होंने कहा कि पटनायक ने वादा किया था कि राज्य सरकार मयूरभंज में निजी आयुर्वेदिक महाविद्यालय और होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण करेगी, ‘‘लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया और दोनों महत्वपूर्ण संस्थान अब बंद हैं।’’
भाजपा नेता ने दावा किया कि पटनायक सुवर्णरेखा सिंचाई परियोजना का तीसरी बार उद्घटान कर रहे हैं जबकि अंतर राज्य सुवर्ण रेखा परियोजना की आधारशिला वर्ष 1984 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जानकी वल्लभ पटनायक ने रखी थी और यह परियोजना अब भी अधूरी है।
सत्तारूढ़ बीजद ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सुवर्णरेखा सिंचाई परियोजना मुख्य योजना है और हिस्से पूरे होने के बाद उद्घाटन किया जा रहा है। इसलिए यह कहना गलत है कि उसी परियोजना का तीसरी बार उद्घाटन हो रहा है।
रिंग रोड के आरोप पर बारिपदा नगरपालिका के अध्यक्ष कृष्णनंद मोहंती ने कहा कि राज्स सरकार ने पहले ही सर्वेक्षण का काम पूरा करा लिया है और अब संभावित विस्थापित लोगों को होने वाले नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि 685 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सुवर्णरेखा सिंचाई परियोजना से 17,121 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी, जबकि 823 करोड़ रुपये की लागत से तैयार देव सिंचाई परियोजना से 9,900 हेक्टेयर की भूमि सिंचित होगी।
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