नयी दिल्ली, चार फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने अदालत के आदेश की अवहेलना करके अवमानना के लिए एक कंपनी को दवा कंपनी फाइजर इंक को दो करोड़ रुपये का हर्जाना देने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि अगर कंपनी त्रिवेणी इंटरकेम प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक दो सप्ताह में राशि का भुगतान करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें हिरासत में लिया जाएगा और यहां तिहाड़ जेल में दो सप्ताह के लिए सिविल कारावास में रखा जाएगा।
अदालत ने अंतरिम आदेश में कंपनी को ‘पाल्बोसिक्लिब’ या किसी भी औषधीय रूप से स्वीकार्य ‘सॉल्ट’ वाले किसी भी उत्पाद को बनाने, बेचने, वितरित करने, विज्ञापन करने, निर्यात या आयात करने से रोक दिया था, क्योंकि इससे वादी फाइजर के पेटेंट का उल्लंघन होगा।
कंपनी ने ‘पाल्बोसिक्लिब’ को बेचना जारी रखा, जिसके कारण अदालत ने प्रतिवादियों को उसके आदेश की जानबूझकर अवज्ञा करने और अदालत की अवमानना करने का दोषी ठहराया।
न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने 24 जनवरी को पारित आदेश में कहा, ‘‘प्रतिवादी ने स्पष्ट रूप से इस अदालत की जानबूझ कर अवमानना की है...कमलेश सिंह (निदेशक) के माध्यम से प्रतिवादी सजा के लिए उत्तरदायी है।’’
उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2021 के अपने अंतरिम आदेश में त्रिवेणी कंपनी को विभिन्न जगहों से दवाओं को हटाने का निर्देश दिया था। हालांकि, ‘पाल्बोसिक्लिब’ की बिक्री जारी रहने के बाद, फाइजर ने अदालत के समक्ष एक अवमानना याचिका दायर की।
फाइजर ने दलील दी थी कि त्रिवेणी कंपनी ने केवल उस पैकेजिंग में बदलाव किया जिसमें ‘पाल्बोसिक्लिब’ उसके द्वारा बेची जा रही थी और अपनी वेबसाइट के साथ-साथ एक तीसरे पक्ष की वेबसाइट पर बिक्री में लिप्त रही तथा कंपनी के निदेशक को अवमानना के लिए दंडित करने का अनुरोध किया।
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