ताजा खबरें | रेल परिवहन संस्थान को विश्वविद्यालय बनाने के प्रावधान वाले विधेयक को संसद की मंजूरी

नयी दिल्ली, आठ अगस्त संसद ने सोमवार को राष्ट्रीय रेल और परिवहन संस्थान को गतिशक्ति विश्वविद्यालय में परिवर्तित करने के प्रावधान वाले केंद्रीय विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, 2022 को मंजूरी प्रदान कर दी।

राज्यसभा ने सोमवार को चर्चा के बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी है।

विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि परिवहन क्षेत्र बहुत जटिल है और विशेष रूप से रेलवे तथा मेट्रो की जटिलता का अनुमान लगाना कठिन है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में मेट्रो के फैलाव को देखते हुए एक अलग कैडर की जरूरत है और इस विश्वविद्यालय से यह जरूरत पूरी होगी।

उन्होंने कहा कि रेलवे की जटिल प्रणाली को सही तरीके से चलाने और आगे बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसी विचार के साथ राष्ट्रीय रेल और परिवहन संस्थान खोला गया था। उन्होंने कहा कि उसके अच्छे परिणाम को देखते हुए व्यापक रूप से गतिशक्ति विश्वविद्यालय की परिकल्पना की गयी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केंद्रीय विश्वविद्यालय होगा और इसका मुख्यालय गुजरात में होगा लेकिन देश में अन्य स्थानों पर भी इसके परिसर खोले जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केंद्रीय संस्थान होगा और यह किसी एक राज्य के लिए सीमित नहीं होगा बल्कि पूरे देश के लिए होगा।

वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शुरू की गयी नई शिक्षा नीति के साथ भारत के ढांचे को बदलने का प्रयास किया जा रहा है और उसी का उदाहरण यह विधेयक है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक काफी सोच-समझ कर तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा कि गतिशक्ति विश्वविद्यालय पांच प्रमुख उद्देश्यों के साथ काम करेगा जिनमें परिवहन से संबंधित पाठ्यक्रम, कौशल विकास, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और परिवहन अर्थशास्त्र तथा अवसंरचना वित्तपोषण शामिल हैं।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से सरकार द्वारा वित्तपोषित होगा और रेलवे ने इसके लिए पहले ही 166 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने इसके साथ ही बताया कि रेलवे ने 2104 से अब तक 3.5 लाख कर्मियों की भर्ती की है। उन्होंने बताया कि रेलवे अब महिला पायलट (चालक) की भी नियुक्ति कर रहा है।

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