नयी दिल्ली, 22 दिसंबर संसद की एक समिति ने सिफारिश की है कि ‘बख्तरबंद वाहन निगम लिमिटेड’ (अवनि) द्वारा बनाये जा रहे एफआईसीवी (भावी इन्फेंट्री युद्धक वाहन) के विकास में तेजी लाई जाए ताकि यह वर्तमान इन्फेंट्री युद्धक वाहन बीएमपी-2 की जगह ले सके।
रक्षा संबंधी संसदीय समिति ने अपनी सिफारिशों पर सरकार द्वारा की-गयी-कार्रवाई रिपोर्ट में कहा है कि ‘बख्तरबंद वाहन निगम लिमिटेड’ (अवनि) ने एफआईसीवी (भावी इन्फेंट्री युद्धक वाहन) के विकास के लिए एक परियोजना शुरू की है जो सैन्य दलों के परिवहन के लिए एक बख्तरबंद वाहन से अधिक होगा और इसमें उन्नत प्रौद्योगिकियां होंगी।
इसमें कहा गया कि एफआईसीवी को अवनि (प्रमुख भागीदार) द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य इकाइयों और भारतीय उद्योग के साथ सहयोग से तथा ‘भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड’ (बीईएल) से इलस्ट्रेशन कंट्रोल, संचार और अन्य इलैक्ट्रॉनिक प्रणालियों के सहयोग से, बीईएमएल से ऑटोमोटिव सिस्टम, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) से एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) प्रणाली के सहयोग से, मिश्र धातु निगम लिमिटेड (मिधानी) से कवच और भारतीय उद्योगों से अन्य उप-प्रणालियों के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।
समिति ने कहा कि उसे पूरी उम्मीद है कि स्वदेशी रक्षा क्षेत्र द्वारा एफआईसीवी के सफल विकास और विनिर्माण और सेना में इसे शामिल करना हमारे सशस्त्र बलों के लिए एक उन्नत प्रौद्योगिकी साबित होगी।
उसने कहा, ‘‘इस संबंध में समिति सिफारिश करती है कि एफआईसीवी के विकास के लिए और अन्य हितधारकों द्वारा अनुसंधान तथा विकास कार्यों में तेजी लाई जाए ताकि यह
सुनिश्चित किया जा सके कि वर्तमान इन्फेंट्री कॉम्बट व्हीकल बीएमपी-2 को भविष्योन्मुखी एफआईसीवी द्वारा समय से विस्थापित कर दिया जाए।’’
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