देश की खबरें | संसदीय समिति ने जीईआर के लक्ष्यों के लिये शिक्षकों की जरूरत को रेखांकित किया, रिक्तियां भरने संबंधी जानकारी मांगी

नयी दिल्ली, 29 दिसंबर संसद की एक समिति ने वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिये काफी संख्या में शिक्षकों की जरूरत को रेखांकित करते हुए संस्थावार मौजूदा रिक्तियों को भरने के प्रयासों की सरकार से जानकारी मांगी है।

संसद में हाल ही में शिक्षा मंत्रालय की उच्च शिक्षा विभाग की वर्ष 2022-23 की अनुदान की मांगों पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट में यह बात कही गई है । समिति ने इस विषय पर सरकार के उत्तर को स्वीकार नहीं किया।

भारतीय जनता पार्टी के सांसद विवेक ठाकुर की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा, ‘‘ वह योग्य एवं कुशल शिक्षकों का एक समूह तैयार करने और संस्थावार मौजूदा रिक्तियों भरने की दिशा में किये जा रहे प्रयासों से अवगत होना चाहेगी।’’

रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने पूर्व में कहा था कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का लक्ष्य 2035 तक सकल नामांकन अनुपात को 50 प्रतिशत तक करना है। ऐसा केवल एक मजबूत निष्पादन योजना और सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।

समिति ने कहा था कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये काफी संख्या में शिक्षकों की जरूरत होगी तथा शिक्षक-छात्र अनुपात में पर्याप्त वृद्धि की आवश्यकता भी होगी। ऐसे में योग्य एवं कुशल शिक्षकों का विशाल समूह तैयार करने एवं रिक्तियों को भरने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाएं।

शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग ने समिति को बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा में एकाधिक प्रवेश एवं निकासी सुविधा है जो शिक्षार्थियों को विभिन्न प्रमाणन विकल्पों के साथ पढ़ाई पूरा करने का लचीला विकल्प प्रदान करती है।

विभाग ने बताया कि सकल नामांकन दर में सुधार के लिये मुक्त दूरस्थ शिक्षा (ओडीएल) और ऑनलाइन कार्यक्रम विनियम 2020 को अधिसूचित किया गया है। 53 उच्च शिक्षण संस्थान 307 पूर्ण ऑनलाइन कार्यक्रम पेश कर रहे हैं । 154 से अधिक विश्वविद्यालयों ने स्वयं पाठ्यक्रम को अपनाया है।

इसके अलावा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने मुक्त एवं दूरस्थ अधिगम शिक्षा और ऑनलाइन शिक्षा 2021 पर दिशानिर्देश तैयार किये हैं।

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