नयी दिल्ली, एक अगस्त संसद की एक समिति ने फिल्मों से जुड़े पक्षकारों द्वारा उठाई गई चिंताओं के आलोक में सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से फिल्मों की प्रमाणन प्रक्रिया के लिए निर्धारित समय सीमा का अक्षरश: पालन करने की सिफारिश की।
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के कार्यकरण की समीक्षा विषय पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने मंगलवार को लोकसभा में पेश रिपोर्ट में यह बात कही।
समित ने इस बात का संज्ञान लिया कि चलचित्र प्रमाणन नियम 1983 फिल्म प्रमाण प्रक्रिया के लिए 68 दिन में आवेदन जमा करने से लेकर प्रमाण पत्र जारी करने तक की समय सीमा निर्धारित करता है। इस समय सीमा में आवेदन की समीक्षा, जांच समिति का गठन, इसकी रिपोर्ट को अध्यक्ष को भेजना, आवेदक को आदेश पहुंचाना, निर्माता द्वारा कटौती, जांच और प्रमाण पत्र जारी करने संबंधी प्रक्रियागत विषय शामिल होते हैं।
समिति को बताया गया है कि सभी फिल्में 68 दिन के भीतर प्रमाणित की जाती हैं और सीबीएफसी के पास 1 महीने से अधिक समय का बैकलॉग नहीं होता है।
रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि ‘इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन’ (आई एम पी पी ए) के अध्यक्ष ने फिल्म प्रमाणन में देरी पर चिंता जताते हुए समिति को सूचित किया है फिल्म के पूर्वावलोकन में अत्यधिक देरी हो रही है।
उसने कहा कि ऑनलाइन प्रमाणन शुरू करने के बाद भी निर्माताओं को पूर्वावलोकन के बारे में एसएमएस प्राप्त करने के लिए हफ्तों का इंतजार करना पड़ता है तथा फिल्म निर्माताओं को फोन पर या लिखित में कोई जानकारी नहीं दी जाती है।
इसके अनुसार, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट का संदर्भ देते हुए कहा कि सीबीएसई द्वारा प्रमाण पत्र जारी करने में लगने वाला समय 3 से 491 दिनों के बीच होता है।
समिति फिल्म निर्माताओं के इस कथन पर चिंता व्यक्त करती है कि बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद 68 दिन की समय सीमा में कोई परिवर्तन नहीं किया गया।
इस बारे में स्पष्टीकरण के लिए पूछे जाने पर सीबीएफसी के प्रतिनिधि ने समिति को बताया कि लगभग सभी फिल्में 20 से 25 दिनों के भीतर प्रमाणित की जाती है और सामान्य तौर पर 15 दिनों के भीतर यह काम किया जाता है।
उन्होंने बताया कि जब फिल्मों को समितियों, उप समितियों और पुनरीक्षण समितियों के माध्यम से प्रमाणित किया जाता है तभी उसमें देरी होती है। उन्होंने यह भी बताया कि यह काम के बोझ पर निर्भर करता है लेकिन अधिकतम 68 दिनों का समय दिया जाता है।
समिति को प्राप्त एक अन्य सुझाव में प्रमाण पत्र जारी करने के लिए लगने वाले समय को घटाकर 3 से 4 दिन करने के संबंध में मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि चलचित्र नियम 1983 में उल्लिखित अधिकतम समय 68 दिन है।
रिपोर्ट के अनुसार समिति इस बात की सराहना करती है कि कुल मिलाकर 68 दिनों में प्रमाणन करने संबंधी प्रक्रिया से जुड़ी समय सीमा का पालन किया जाता है, फिर भी पक्षकारों द्वारा उठाई गई चिंताओं के आलोक में समिति मंत्रालय और सीबीएफसी को प्रमाणन प्रक्रिया के लिए समय सीमा का अक्षरश: पालन करने की सिफारिश करती है ।
दीपक
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