ताजा खबरें | संसद ने कर्नाटक की दो आदिवासी जातियों को एसटी श्रेणी में लाने संबंधी विधेयक को दी मंजूरी

नयी दिल्ली, 22 दिसंबर संसद ने बृहस्पतिवार को कर्नाटक की दो आदिवासी जातियों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की श्रेणी में लाने के प्रावधान वाले एक विधेयक को मंजूरी दे दी।

राज्यसभा ने ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (चौथा संशोधन) विधेयक, 2022’ को चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।

इससे पहले जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि आदिवासियों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा हो रही है और सदन में विपक्ष के सदस्य मौजूद नहीं हैं।

चीन सीमा विवाद के मुद्दे पर आज कांग्रेस सहित विपक्ष के कई दलों के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया था और विधेयक पर इन सदस्यों की अनुपस्थिति में चर्चा की गयी।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक में काडू कुरूबा एवं बेट्टा कुरूबा आदिवासियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार इस विधेयक के माध्यम से न्याय देने जा रही है।

मुंडा ने कहा कि कुछ सदस्यों ने यह मांग की कि एक समग्र विधेयक लाकर सरकार को सभी आदिवासियों को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान की भावना के तहत मोदी सरकार विकास की राह में पीछे रह गये लोगों की पहचान कर आगे ला रही है और ऐसे विधेयक लाकर उनके हितों की पूर्ति कर रही है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी स्वाभिमान दिवस को केवल आदिवासियों को ही नहीं पूरे देश को गर्व के साथ मनाना चाहिए।

इससे पहले विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के अरुण सिंह ने संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (चौथा संशोधन) विधेयक का समर्थन किया और कहा कि कर्नाटक के विकास में आदिवासियों का बहुत योगदान रहा है। इस वर्ग के लोगों ने स्वाधीनता संग्राम में भी बड़ी भूमिका निभायी थी।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक में आदिवासियों के लिए अलग से मंत्रालय बनाने का निर्णय हाल में राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने किया। उन्होंने कहा कि येदियुरप्पा की अगुवाई वाली पूर्व भाजपा सरकार ने महर्षि वाल्मीकि जयंती को राज्य अवकाश घोषित किया ।

सिंह ने कहा कि कर्नाटक की वर्तमान सरकार ने आदिवासियों के लिए आरक्षण की वर्तमान आरक्षण सीमा को तीन प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत करने का निर्णय किया है और इससे संबंधित प्रस्ताव को विधानसभा की शीघ्र अनुमति मिलने की उम्मीद है।

आम आदमी पार्टी के संत बलवीर सिंह ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि जिन लोगों के पास धन बल, बाहु बल और राजनीतिक बल होता है, वे गरीबों के ऊपर जुल्म करते हैं।

तृणमूल कांग्रेस की डोला सेना ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि कुछ जातियों के नाम में हिज्जे में फर्क होने के कारण इस वर्ग के लोगों को एसटी आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी अधिकतर आदिवासियों को शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाएं नहीं मिल पातीं।

बीजू जनता दल के निरंजन बिशी ने विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि ओड़िशा में भी कई ऐसी आदिवासी जातियां हैं जिन्हें जनजाति श्रेणी में लाने की लंबी समय से मांग रही है।

अन्नाद्रमुक के एम थंबीदुरै ने विधेयक का स्वागत करते हुए मांग की तमिलनाडु के मछुआरों को जनजातियों की श्रेणी में लाया जाना चाहिए।

झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माझी ने झारखंड में कोयला खदानों में लगी आग का विषय उठाते हुए कहा कि इससे आदिवासियों के उनके मूल स्थान से उजड़ने का खतरा है।

चर्चा में भाग लेते हुए वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सुभाष चंद्र पिल्लै एवं भाजपा के जग्गेश, लहर सिंह सिरोया ने आदिवासी समुदायों के कल्याण के लिए विभिन्न उपाय करने के सुझाव दिये।

मंत्री के जवाब के बाद उच्च सदन ने कर्नाटक के काडू कुरूबा एवं बेट्टा कुरूबा समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के प्रावधान वाले ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (चौथा संशोधन) विधेयक, 2022’ को ध्वनि मत से मंजूरी दे दी।

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