इस्लामाबाद, 16 अगस्त गहरे वित्तीय संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि संरचनात्मक खामियों की वजह से पाकिस्तान आर्थिक परवान नहीं भर पाया और आज के समय में आर्थिक दुश्वारियों में उलझा हुआ है।
शरीफ ने पाकिस्तान की आजादी के 75 साल पूरे होने के मौके पर पत्रिका ‘द इकनॉमिस्ट’ में लिखे अपने एक लेख में पाकिस्तान के मौजूदा आर्थिक संकट पर रोशनी डाली है। इसमें उन्होंने कहा है कि तीन संरचनात्मक खामियों की वजह से पाकिस्तान की वृद्धि पर असर पड़ा और बार-बार यह उछाल एवं गिरावट के भंवर में फंसता रहा।
शरीफ ने कहा है कि 1960 के दशक में पाकिस्तान को उम्मीद और वादे से भरपूर देश के रूप में देखा जाता था और उसके ‘अगला एशियाई बाघ’ बनने की संभावना जताई जाती थी। लेकिन वर्ष 2022 में हालात ऐसे हो गए हैं कि पाकिस्तान आर्थिक संकट में फंस चुका है।
उन्होंने इस स्थिति के लिए मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के अलावा लंबे समय से कायम घरेलू कमजोरियों को भी जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि संरचनात्मक खामियों को दूर करने पर भी अधिक ध्यान नहीं दिया गया है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक परिवेश का तेजी से ध्रुवीकृत होना और स्वास्थ्य, शिक्षा एवं ढांचागत विकास जैसे बुनियादी पहलुओं पर समुचित निवेश न करने के अलावा भूमंडलीकरण के लाभों का दोहन करने से वंचित रह जाने से पाकिस्तान पिछड़ता चला गया है।
शरीफ ने कहा, ‘‘आज के समय में पाकिस्तान दुनिया की सबसे ज्यादा खपत आधारित अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। हमारे सकल घरेलू उत्पाद में 90 प्रतिशत से अधिक अंशदान खपत का है। इसके उलट हम अपने उत्पादन का सिर्फ 15 प्रतिशत निवेश करते हैं और महज 10 प्रतिशत निर्यात करते हैं। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश जीडीपी के एक प्रतिशत से भी कम है।’’
उन्होंने कहा कि ये आर्थिक आंकड़े पाकिस्तान को अपने अंदर झांकने के लिए मजबूर करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह स्थिति हमारे आर्थिक मॉडल में मौजूद खामियों को दर्शाती है। कोई भी देश कभी भी इस तरह बढ़ नहीं पाया है।’’
प्रेम
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