तिरुवनंतपुरम, 19 अप्रैल सचिवालय के बाहर 69 दिन से विरोध प्रदर्शन कर रहीं आशा कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने शनिवार को कहा कि केरल सरकार द्वारा उनकी सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष तय करने के आदेश पर रोक का फैसला उनके आंदोलन की जीत है।
केरल आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता संघ (केएएचडब्ल्यूए) के नेतृत्व में मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) कार्यकर्ताओं का एक वर्ग सेवानिवृत्ति लाभ और मानदेय में बढ़ोतरी की मांग को लेकर 10 फरवरी से सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहा है।
केएएचडब्ल्यूए महासचिव एम ए बिंदु ने यहां एक टेलीविजन चैनल से कहा कि प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं को राज्य की स्वास्थ्य मंत्री ने कई बार बताया कि उनकी सेवानिवृत्ति आयु तय करने वाले आदेश पर रोक लगा दी गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा आदेश अभी आया है। इसलिए यह निश्चित रूप से हमारे आंदोलन की जीत है।’’
साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदर्शकारी आशा कार्यकर्ता चाहती हैं कि सरकार पहले यह घोषणा करे कि उनकी सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष होगी और साथ ही सेवानिवृत्ति लाभ भी मिलेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष है। हालांकि, अगर आप 60 से 65 वर्ष की आयु के बीच सेवानिवृत्त होते हैं, तो आपको सेवानिवृत्ति लाभ मिलता है। हम भी यही चाहती हैं कि यहां भी ऐसा ही हो।’’
बिंदु ने यह भी कहा कि आशा कार्यकर्ताओं का विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक सेवानिवृत्ति लाभ और मानदेय में वृद्धि की उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती।
आशा कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन क्रमिक भूख हड़ताल पर भी हैं, जो अपने 29वें दिन में प्रवेश कर गई है।
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