देश की खबरें | मोहपाश मामले में मप्र उच्च न्यायालय का आदेश : 13 अगस्त को ‘‘इन कैमरा’’ कार्यवाही होगी
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

इंदौर (मध्यप्रदेश), छह अगस्त मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने कुख्यात मोहपाश मामले में 13 अगस्त को "इन-कैमरा" कार्यवाही (सीमित पक्षों की मौजूदगी में होने वाली अदालती सुनवाई) करने का बृहस्पतिवार को आदेश दिया।

अदालत ने राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के प्रमुख और महाधिवक्ता को इस कार्यवाही के दौरान मौजूद रहने के लिये पाबंद किया है।

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न्यायमूर्ति एससी शर्मा और न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रदेश के महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव का अनुरोध मंजूर करते हुए यह आदेश दिया। इस याचिका में मोहपाश मामले में एसआईटी की जांच पर सवाल उठाते हुए इसकी सीबीआई से दोबारा जांच कराने की मांग की गयी है।

कौरव ने युगल पीठ को बताया कि मोहपाश मामले के आरोपियों के साथ कुछ लोगों की जो बातचीत जांच के घेरे में है, उसमें विभिन्न व्यक्तियों के नाम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किन्हीं दो लोगों के बीच की बातचीत अपराध नहीं हो सकती और यह देखे जाने की जरूरत है कि इस सिलसिले में कोई जुर्म हुआ है या नहीं।

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महाधिवक्ता ने कहा कि मामले से संबंधित बातचीत से जुड़े लोगों के नामों का सार्वजनिक तौर पर खुलासा नहीं किया जाना चाहिये। लिहाजा अगली सुनवाई के दौरान "इन-कैमरा" कार्यवाही होनी चाहिये।

अदालत ने इस गुहार को प्रामाणिक बताते हुए कहा, "अगले बृहस्पतिवार होने वाली इन-कैमरा कार्यवाही के दौरान एसआईटी प्रमुख और महाधिवक्ता खुद को हाजिर रखें।"

मामले की जांच से जुड़े आईपीएस अधिकारी अवधेश गोस्वामी ने अदालत के सामने तीन सीलबंद लिफाफे पेश किये। युगल पीठ ने आदेश दिया कि तीनों लिफाफों को एक लिफाफे में फिर से सीलबंद किया जाये और इसे प्रधान रजिस्ट्रार को सौंपा जाये।

अदालत ने कहा कि प्रधान रजिस्ट्रार इस लिफाफे को अगले बृहस्पतिवार (13 अगस्त) को होने वाली सुनवाई के दौरान पेश किये जाने के लिये तैयार रखें।

गौरतलब है कि मोहपाश गिरोह की पांच महिलाओं और उनके ड्राइवर को भोपाल और इंदौर से सितंबर 2019 में गिरफ्तार किया गया था। गिरोह खुफिया कैमरों से अंतरंग पलों के वीडियो बनाकर अपने "शिकारों" को इस आपत्तिजनक सामग्री के जरिए ब्लैकमेल करता था। इस खुलासे के कुछ दिन बाद राज्य सरकार ने मामले की विस्तृत जांच के लिये एसआईटी गठित की थी।

पुलिस ने इस मामले में एक स्थानीय अदालत में 16 दिसंबर 2019 को पेश आरोप पत्र में कहा था कि संगठित गिरोह मानव तस्करी के जरिये भोपाल लायी गयी युवतियों के जरिए धनवान लोगों और ऊंचे ओहदों पर बैठे लोगों को अपने जाल में फांसता था। फिर उनके अंतरंग पलों के वीडियो, सोशल मीडिया चैट के स्क्रीनशॉट आदि के आधार पर उन्हें ब्लैकमेल करता था।

आरोप पत्र के मुताबिक गिरोह ने उसके जाल में फंसे रसूखदारों को धमकाकर उनसे सरकारी कारिंदों की "ट्रांसफर-पोस्टिंग" की सिफारिशें तक करायी थीं और इन कामों के आधार पर भी अवैध लाभ कमाया था।

हर्ष

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