नयी दिल्ली, सात जुलाई लाइसेंस निलंबित होने के बावजूद आरोपियों, अभियुक्त को जमानत दिलाने और सजा निलंबित कराने के लिए चिकित्सा प्रमाणपत्र जारी करने वाला एक डॉक्टर दिल्ली उच्च न्यायालय के जांच के घेरे में आ गया ।
अदालत ने इस डाक्टर द्वारा कथित रूप से फर्जी चिकित्सा प्रमाणपत्र जारी करने के मामले की जांच का निर्देश पुलिस को दिया है।
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अदालत ने दिल्ली पुलिस के कानूनी सेल और अभियोजन निदेशालय को रिकॉर्ड की छानबीन करने और यह पता लगाने का निर्देश दिया है कि डॉ. गजेंद्र कुमार नैयर के चिकित्सा प्रमाणपत्र और पैथोलॉजी की रिपोर्ट के आधार पर पिछले दो साल में कितने मामलों में आरोपियों या दोषियों को जमानत, अंतरिम जमानत दी गयी और सजा को निलंबित किया गया ।
अदालत हत्या की कोशिश के मामले में एक आरोपी की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोपी ने द्वारका के एक निजी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ नैयर का पर्चा देकर कहा कि उसकी पत्नी को ‘ओवेरियन सिस्ट’ है और तुरंत उसे सर्जरी कराने की जरूरत है ।
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पुलिस ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में छह मामलों का हवाला दिया जिसमें छह आरोपियों ने परिवार के सदस्यों की बीमारी के नाम पर जमानत मांगी थी और सभी मामले में डॉ. नैयर ने चिकित्सा रिपोर्ट दी थी।
हालांकि, सत्यापन किए जाने पर पाया गया कि अदालत के सामने भ्रामक तथ्यों को रखा गया है और या तो मरीज का नाम अस्पताल के रिकॉर्ड में नहीं मिला या अस्पताल में उस सर्जरी की व्यवस्था ही नहीं थी जिसके लिए चिकित्सा रिपोर्ट जारी की गयी थी।
दिल्ली चिकित्सा परिषद ने अपने मार्च के आदेश में दर्ज किया था कि डॉक्टर द्वारका मोड़ पर नर्सिंग होम और पैथोलॉजी चलाता है और निचली अदालत को एक शिकायत भी अग्रसारित कर दी गयी थी। इसमें कहा गया था कि डॉ. नैयर ने आरोपी के साथ साठगांठ कर मरीज को सर्जरी के नाम पर अदालत को गुमराह किया ।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने डॉक्टर के खिलाफ लगाए गए आरोपों के संबंध में दिल्ली पुलिस के डीसीपी अपराध शाखा द्वारा जांच करने और अदालत में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया ।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन द्वारा लगाए गए आरोपों में जरा भी गुण-दोष पाया गया तो अपराध शाखा को न्यायिक आदेश का इंतजार किए बगैर ही कानून के मुताबिक कार्रवाई करने की स्वतंत्रता होगी ।
अदालत मामले में 16 जुलाई को आगे सुनवाई करेगी और पुलिस को अगली तारीख पर एक नयी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया ।
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के स्थायी वकील (अपराध) राहुल मेहरा ने अतिरिक्त लोक अभियोजक तरंग श्रीवास्तव के साथ दी अर्जी में कहा कि 19 अप्रैल 2019 से 29 नवंबर तक लाइसेंस निलंबित होने के बावजूद डॉ. नैयर मरीजों को देख रहा था । इस दौरान उसने चिकित्सा प्रमाणपत्र भी जारी किए जिसके आधार पर जमानत, अंतरिम जमानत और सजा निलंबित करवाने के लिए अदालतों में कई याचिकाएं दायर की गयी ।
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