देश की खबरें | कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम के सदस्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश

नयी दिल्ली, 27 अगस्त दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम का हिस्सा रहे चिराग पटनायक के खिलाफ एक महिला की "प्रथम दृष्टया" गरिमा को ठेस पहुंचाने को लेकर आरोप तय करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि किसी पुरुष के अवांछित व्यवहार के कारण किसी महिला को हुई दिक्कत को "मामूली नुकसान" नहीं कहा जा सकता।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजिंदर सिंह ने ये निर्देश 23 अगस्त को एक मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए पारित किए, जिसने पिछले साल अप्रैल में कहा था कि भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 509 के तहत दंडनीय अपराध के लिए आरोप बनते हैं।

सत्र अदालत ने कहा कि उसे उपरोक्त आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं मिला।

न्यायाधीश ने कहा कि शिकायत में विशिष्ट आरोप हैं कि आरोपी ने बिना किसी विशिष्ट कारण के अपने सहकर्मी के कंधों और हाथों को थपथपाया।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘शिकायत में उल्लिखित अन्य आरोपों के मद्देनजर, इस स्तर पर यह विश्वास करने का कोई कारण नहीं है कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के कंधों और हाथों को सहज तरीके से या किसी कानूनी रूप से उचित मजबूरी/कारण से थपथपाया।’’

न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी द्वारा शिकायतकर्ता के कंधों और हाथों को थपथपाना आपराधिक बल प्रयोग है क्योंकि इससे शिकायतकर्ता को दिक्कत हुई।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे विचार से किसी पुरुष के अवांछित व्यवहार के कारण किसी महिला (शिकायतकर्ता/पीड़ित) को होने वाली किसी भी दिक्कत को 'मामूली नुकसान' नहीं कहा जा सकता है, जिसके लिए सामान्य ज्ञान वाली महिला को...शिकायत नहीं करनी चाहिए।’’

न्यायाधीश ने कहा कि प्रथम दृष्टया, किसी महिला के शरीर को इस तरह से देखना जिससे वह असहज हो जाए, उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाना होगा। उन्होंने कहा कि शिकायत में, विशिष्ट आरोप थे कि उक्त व्यक्ति शिकायतकर्ता महिला को घूरता था।

शिकायत के अनुसार, पटनायक ने कार्यालय में कई मौकों पर "अनैतिक व्यवहार" से शिकायतकर्ता को कथित तौर पर असहज किया।

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