नयी दिल्ली, 27 जून विपक्षी पार्टियों ने समान नागरिक संहिता से जुड़़ी टिप्पणी को लेकर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए उनपर महंगाई एवं बेरोजगारी जैसे असल मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की पुरजोर वकालत करते हुए सवाल किया कि ‘‘दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चलेगा?’’
उन्होंने साथ ही कहा कि संविधान में भी सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार का उल्लेख है।
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी कुछ भी कह सकते हैं, लेकिन उन्हें महंगाई, बेरोजगारी और मणिपुर के मुद्दों पर जवाब देना चाहिए।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवाल किया कि यदि यह लागू हुआ, तब आदिवासियों की संस्कृति और परंपराओं का क्या होगा।
प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर बघेल ने कहा, ‘‘आप (भाजपा) हमेशा हिंदू-मुस्लिम दृष्टिकोण से क्यों सोचते हैं? छत्तीसगढ़ में आदिवासी हैं। उनकी रूढ़ियों और उनके नियमों का क्या होगा, जिनके माध्यम से उनका समाज संचालित होता है। यदि समान नागरिक संहिता लागू हो गया, तो उनकी परंपरा का क्या होगा?''
तीन तलाक, समान नागरिक संहिता और पसमांदा मुसलमानों पर टिप्पणी को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को सवाल किया कि प्रधानमंत्री पाकिस्तान से प्रेरणा क्यों ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री द्वारा कथित रूप से समान नागरिक संहिता का उल्लेख किये जाने का हवाला देते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) नेता ओवैसी ने सवाल किया कि क्या यूसीसी के नाम पर देश के बहुलवाद और विविधता को ‘‘छीन लिया जाएगा।’’
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी को लेकर उन पर प्रहार करते हुए मंगलवार को कहा कि उन्हें इस तरह के मुद्दे को ‘‘एक विशेष वर्ग को समझ में आनी वाली कूट में संदेश देने की राजनीति’’ का औजार नहीं बनाना चाहिए।
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