ताजा खबरें | राज्यसभा में विपक्ष ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और पेगासस स्पाइवेयर के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा

नयी दिल्ली, तीन फरवरी राज्यसभा में बृहस्पतिवार को कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई, गरीबों और अमीरों के बीच बढ़ती खाई और पेगासस स्पाइवेयर के मुद्दों पर सरकार को घेरा तथा दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के कार्यकाल में सामाजिक समरसता को बाधित किया गया और धर्मांधता के नाम पर समाज में कटुता फैलायी गयी।

वहीं सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए दावा किया कि वर्तमान सरकार के शासन में ‘‘तुष्टिकरण की सियासत और करप्शन (भ्रष्टाचार) की विरासत’’ पर रोक लग गयी है।

उच्च सदन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए दावा किया कि मोदी सरकार की नीति एक ऐसे संगठन से प्रभावित है, जिसका लोकतांत्रिक मूल्यों व संविधान में विश्वास नहीं है और जिसने तिरंगा व संविधान का विरोध किया था। उन्होंने किसी संगठन का नाम लिए बिना कहा कि उस संगठन का प्रयास एक वर्ग को राष्ट्रविरोधी बताना तथा देश में वैमनस्य को बढ़ावा देना है।

उन्होंने पिछले दिनों हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में दिए गए भड़काऊ भाषणों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्माद फैलाने वाले भाषणों पर प्रधानमंत्री मोदी ने कोई टिप्पणी नहीं की।

उन्होंने कहा कि इस सरकार की सामाजिक-आर्थिक नीति ऐसी रही है, जिससे धनी वर्ग और धनी होता गया वहीं गरीब और गरीब होते गए।

सिंह ने देश में बेरोजगारी में तेजी से वृद्धि होने का दावा करते हुए कहा कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देश में अमीर-गरीब की खाई सबसे ज्यादा भारत में ही है। उन्होंने कहा कि सरकार के कदम गरीब विरोधी हैं और वह एक ओर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में लगातार वृद्धि करती रही, वहीं दूसरी ओर आम आदमी को मिलने वाली सब्सिडी भी घटाती रही।

चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के निपुन बोरा ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ‘‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’’ की बात करती है। उन्होंने कहा ‘‘आपका (सरकार का) विश्वास आपके मंत्रियों, न्यायाधीशों और विपक्ष के नेताओं पर नहीं है।...इसीलिए आपने विदेश से स्पाइवेयर मंगाया...पेगासस मंगवाया और लगा दिया।’’

बोरा ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने यह कह कर देश को गुमराह किया कि इसका (स्पाइवेयर का) इस्तेमाल नहीं किया गया।’’ उन्होंने कहा कि न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट से सारी सच्चाई सामने आ गयी है।

उन्होंने महिला सशक्तिकरण की चर्चा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार, 2019 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के तीन लाख 80 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि 2020 में ऐसे अपराधों की संख्या तीन लाख 57 हजार रही।

कांग्रेस सदस्य ने आरोप लगाया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून का बहुत दुरूपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि पिछले साल दिसंबर में सेना ने नगालैंड में 14 आम नागरिकों की जान ले ली। उन्होंने कहा, ‘‘आम तौर पर हमारी सेना का उपयोग विदेशी आक्रमण के विरूद्ध किया जाता है। किंतु हमारी सेना ने हमारे ही लोगों को मार दिया और कुछ भी नहीं किया गया।’’

उन्होंने दावा किया कि पिछले सात सालों में करीब पांच करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे चले गये हैं। उन्होंने कहा कि अभिभाषण में बेरोजगारी, आसमान छूती महंगाई को रोकने के लिए कोई घोषणा नहीं की गयी।

भारतीय जनता पार्टी के नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने दावा किया कि पिछले आठ साल में देश में सबसे बड़ा बदलाव यह आया कि आज प्रधानमंत्री ‘‘मजबूर नहीं मजबूत’’ हैं और ‘‘तुष्टिकरण की सियासत और करप्शन (भ्रष्टाचार) की विरासत’’ पर रोक लग गयी है।

उच्च सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय मंत्री नकवी ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का नाम लिये बिना उनके कल के लोकसभा के भाषण में दो भारत होने का जिक्र किया और कहा, ‘‘आज कहा जा रहा है कि देश में दो भारत एक साथ है। किंतु हमारी नजर में एक भारत है, श्रेष्ठ भारत है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हिंदुस्तान की संस्कृति, संस्कार, संकल्प और समावेशी सोच को समझने के लिए हमें ‘इंडिया इज इंदिरा और इंदिरा इज इंडिया’ एवं ‘कांग्रेस इज कंट्री और कंट्री इज कांग्रेस’ के सुरूर और सोच से बाहर निकलना होगा।’’

उन्होंने कहा कि इस सुरूर से निकले बिना ‘‘हम देश की भावना और गौरव को समझ नहीं सकते हैं।’’

उल्लेखनीय है कि कल लोकसभा में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार में दो हिंदुस्तान बन गए हैं जिनमें से एक अमीरों और दूसरा गरीबों के लिए है।

नकवी ने कहा कि पिछले 18 वर्ष में सबसे बड़ा यह बदलाव हुआ कि ‘‘प्रधानमंत्री पद की गरिमा, विश्वसनीयता और सम्मान बहाल हुआ है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज से आठ साल पहले प्रधानमंत्री कार्यालय कहीं और से चलता था, प्रधानमंत्री को निर्देश कहीं और से मिलता था...कैबिनेट जो निर्णय करती थी, उसे ‘न्यूसेंस और नानसेंस’ कहकर फाड़ दिया जाता था।’’

उन्होंने दावा किया,‘‘आज मजबूर प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि मजबूत प्रधानमंत्री हैं।’’

नकवी ने कहा कि आज से आठ साल पहले सरकार को लेकर भ्रष्टाचार की जो चर्चाएं होती थीं, वे आज सुनने को नहीं मिलतीं। उन्होंने कहा कि आज ‘‘कट, कमीशन और करप्शन की विरासत और तुष्टिकरण की सियासत पर रोक लगी है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पड़ोसी देश ने एक बार हिमाकत करने की कोशिश की थी किंतु हमारे सुरक्षा बलों ने घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की और चूहे के बिल से निकाल कर आतंकवादियों को तबाह किया। ’’

चर्चा में भाग लेते हुए अन्नाद्रमुक के डॉ. एम थंबीदुरै ने कहा कि बंगाल की खाड़ी और मन्नार की खाड़ी में तमिलनाडु के मछुआरों को श्रीलंका की नौसेना द्वारा लगातार परेशान किया जा रहा है और लूटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को देश के मछुआरों की हितों की रक्षा करने और रोजी रोटी को बचाने के लिए कोई दृढ़ नीति बनानी चाहिए।

अन्नाद्रमुक नेता ने दावा किया कि श्रीलंका का झुकाव अब चीन की तरफ होता जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘इससे भारत की सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। चीनी सरकार अरूणाचल प्रदेश एवं अन्य स्थानों पर जो कर रही है, सिर्फ उससे ही नहीं, बल्कि श्रीलंका में भी जो वह कर रही है, उससे भारत के लिए खतरा उत्पन्न हो रहा है। इसलिए यह बिल्कुल उपयुक्त समय हैं कि हमें वह कदम (कच्चातिवु को वापस लेने का) उठाना चाहिए।’’

अन्नाद्रमुक नेता ने कहा कि नीट परीक्षा को लेकर सरकार को विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सहित विभिन्न अखिल भारतीय परीक्षाओं के मामले में राज्य सरकारों को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।

चर्चा में भाग लेते हुए राष्ट्रीय जनता दल के ए डी सिंह ने सरकार से सवाल किया कि रिक्त पड़े प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) पद पर कब तक नियुक्ति की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि जिन लोगों ने नरसंहार एवं एक विशिष्ट वर्ग के लोगों को मारने का आह्वान किया था, उनके विरूद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गयी है?

द्रमुक के आर एस भारती चर्चा में भाग लेते हुए राष्ट्रीय प्रवेश और पात्रता परीक्षा (नीट) के दायरे से तमिलनाडु को बाहर ना रखे जाने को संघीय व्यवस्था के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में राज्य सरकार ने प्रस्ताव पारित किया है लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार कोई सकारात्मक कदम नहीं उठा रही है।

चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस के जवाहर सरकार ने सीमा सुरक्षा बल का अधिकार क्षेत्र बढ़ाए जाने, भारतीय प्रशासनिक सेवा (संवर्ग) नियामवली 1954 के प्रस्तावित संशोधन संबंधी फैसलों का उल्लेख करते हुए सरकार ने कहा कि विपक्ष शासित राज्य सरकारें इन फैसलों का विरोध कर रही हैं लेकिन इसके बावजूद इन एकतरफा फैसलों को उनपर थोपा जा रहा है। इन फैसलों को उन्होंने संघीय व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला करार दिया।

माधव ब्रजेंद अविनाश

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