नागपुर, 26 दिसंबर महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेताओं ने मंत्री अब्दुल सत्तार पर पिछली राज्य सरकार में मंत्री रहते हुए चारागाह के लिए आरक्षित भूमि के एक निजी व्यक्ति के पक्ष में ‘नियमितीकरण’ के आदेश में अनियमितता बरतने का आरोप लगाया और उनके इस्तीफे की मांग की।
विपक्षी दलों के नेता सदन में अध्यक्ष के आसन के सामने आ गए और उन्होंने नारेबाजी की, कार्यवाही को बाधित किया और कृषि मंत्री सत्तार के इस्तीफे की मांग की।
सत्तार ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार में राजस्व राज्य मंत्री रहते हुए जून 2020 में यह आदेश पारित किया था।
विपक्ष के नेता अजीत पवार ने सोमवार को विधानसभा में यह मामला उठाया और 150 करोड़ रुपए की अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्तार का भूमि नियमितीकरण आदेश अदालत के फैसले का स्पष्ट उल्लंघन है।
पवार ने कहा, ‘‘मंत्री ने पद का दुरुपयोग किया। उन्हें तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए। यदि वह इस्तीफा नहीं देते हैं, तो उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए।’’
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता ने आरोप लगाया कि अगले महीने आयोजित होने वाले सिल्लोड कृषि मेले के लिए सरकारी तंत्र एवं धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। सिल्लोड सत्तार का निर्वाचन क्षेत्र है।
बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने सत्तार को सार्वजनिक चारागाह के लिए आरक्षित भूमि के कब्जे को एक निजी व्यक्ति के पक्ष में नियमित करने का आदेश देने के लिए पिछले सप्ताह नोटिस जारी किया था। पीठ जून 2022 में सत्तार के राजस्व मंत्री रहने के दौरान दिए गए आदेश के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका के अनुसार, 37 एकड़ चारागाह के लिए निर्धारित सार्वजनिक जमीन को एक निजी व्यक्ति के पक्ष में ‘नियमित’ किया गया था।
उच्च न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया सत्तार ने यह जानकारी होने के बावजूद आदेश पारित किया कि अतिरिक्त जिला न्यायाधीश वाशिम ने चारागाह भूमि पर कब्जे को जारी रखने के लिए निजी व्यक्ति के दावे को अस्वीकार कर दिया था।
उच्च न्यायालय मामले पर 11 जनवरी 2023 पर आगे की सुनवायी करेगा।
सत्तार शिवसेना के उन 40 विधायकों में शामिल हैं, जिन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ठाकरे के खिलाफ विद्रोह किया था, जिसके कारण एमवीए सरकार गिर गई थी।
महाराष्ट्र के कृषि मंत्री सत्तार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की नेता सुप्रिया सुले के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण पिछले महीने भी राकांपा की आलोचना झेलनी पड़ी थी। इसके बाद सत्तार ने कहा था कि यदि उनकी टिप्पणी से किसी को ठेस पहुंची है, तो उन्हें खेद है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने सुले के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की थी।
फडणवीस ने कहा कि उन्होंने (भूमि विवाद मामले में) अदालत का आदेश पढ़ा नहीं है और ‘‘हम इस बारे में सूचना प्राप्त करेंगे।’’
पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण (कांग्रेस) ने कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है और सत्तार को कैबिनेट का हिस्सा नहीं होना चाहिए।
राकांपा नेता दिलीप वाल्से-पाटिल ने मांग की कि सत्तार के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की जाए और मामले की जांच की जाए।
अजीत पवार ने यह भी आरोप लगाया कि अगले महीने की शुरुआत में होने वाले सिल्लोड कृषि महोत्सव के लिए सरकारी तंत्र और धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।
फडणवीस ने कहा कि सरकार मामले की जांच करेगी।
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