लखनऊ, 16 फरवरी बिहार के पूर्व राज्यपाल फागू चौहान ने रविवार को कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ से न केवल समय व धन की बचत होगी बल्कि देश का विकास और आमजनमानस पर भी बार-बार होने वाले चुनाव का प्रभाव नहीं पड़ेगा।
चौहान ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के सिलसिले में यहां आयोजित एक बैठक को संबोधित कर रहे थे।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनीष दीक्षित ने रविवार को बताया कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को व्यापक जनसमर्थन मिले इसके लिए पूर्व राज्यपाल फागू चौहान की अध्यक्षता और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह की मौजूदगी में एक बैठक सम्पन्न हुई।
दीक्षित ने बताया कि समाज के सभी वर्गों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम जनमानस के बीच ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के प्रति समर्थन को लेकर योजना पर चर्चा हुई।
अपने संबोधन में चौहान ने कहा, “एक साथ चुनाव कराना कोई नई बात नहीं है। स्वतंत्र भारत में 1951 से लेकर 1967 तक सभी राज्य की विधानसभाओं और लोकसभा के आम चुनाव साथ-साथ होते थे।”
एक बयान के अनुसार, पार्टी के प्रदेश महामंत्री (संगठन) सिंह ने कहा, “अलग-अलग समय पर राज्यों तथा लोकसभा चुनाव होने से देश के संसाधनों तथा श्रम शक्ति का ह्मस होता है।’’
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने 1984 के आम चुनाव में अपने घोषणा पत्र में राष्ट्र में एक राष्ट्र-एक चुनाव कराने का संकल्प लिया था।
बयान के अनुसार, ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभा के चुनाव एक साथ कराना है ताकि राजनीतिक स्थिरता में मदद मिले और विकास कार्यों की निरन्तरता बनी रहे।
इसमें कहा गया कि भाजपा इसके लिये अभियान चलाएगी।
बयान के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में शिक्षकों, समाजसेवियों, छात्रों और युवाओं, महिलाओं आदि के कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
इसमें कहा गया कि बैठक में सुनिश्चित किया गया कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय में एक सम्मेलन, कानपुर में व्यापारी संस्थाओं का कार्यक्रम और लखनऊ में समाजसेवी संगठनों का कार्यक्रम फरवरी अंत तक या मार्च के प्रथम सप्ताह में कराया जाएगा।
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