देश की खबरें | अधिकारियों को शमनीय अपराध का निपटारा मौके पर ही करने के लिए सशक्त किया गया: दिल्ली सरकार ने अदालत से कहा

नयी दिल्ली, 28 अगस्त दिल्ली सरकार ने सोमवार को उच्च न्यायालय को बताया कि यातायात उल्लंघन के शमनीय (कंपाउंडिंग) अपराधों का मौके पर ही निपटारा करने के लिए अधिकारियों को सशक्त बनाने की अधिसूचना जारी की जा चुकी है।

अदालत को दिल्ली सरकार ने बताया कि केंद्र सरकार के ‘डिजीलॉकर एप्लीकेशन’ में उपलब्ध सभी दस्तावेजों को अधिकारी वैध मान रहे हैं।

दिल्ली सरकार ने यह भी कहा कि परिवहन विभाग की प्रवर्तन शाखा द्वारा जारी किए गए किसी भी चालान का निपटान ऑनलाइन किया जा सकता है और जुर्माने की राशि डेबिट कार्ड सहित अन्य भुगतान गेटवे के माध्यम से स्वीकार्य है।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ के समक्ष एक जनहित याचिका पर ये दलीलें दी गईं। याचिका में दिल्ली सरकार को यातायात उल्लंघन के शमनीय अपराधों को मौके पर ही निपटाने के लिए अधिकारियों को सशक्त बनाने वाली अधिसूचना जारी करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

शमनीय अपराध वे होते हैं जिनके लिए उल्लंघनकर्ता को मौके पर ही जुर्माना भरने की अनुमति होती है और चालक को अदालत जाने की आवश्यकता नहीं होती है। राज्यों द्वारा अधिसूचित किए जाने के बाद उल्लंघनकर्ता व्यक्ति नामित अधिकारियों को जुर्माना राशि का भुगतान कर सकता है।

वकील अमित साहनी की याचिका में कहा गया है कि मोटर वाहन (एमवी) अधिनियम में सितंबर 2019 में संशोधन के बाद, लोगों को यातायात उल्लंघन के लिए जारी किए गए चालान का शमन करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है क्योंकि उल्लंघनकर्ता मौके पर जुर्माना नहीं भर सकते हैं और उन्हें जुर्माना भरने के लिए अदालत का रुख करना पड़ता है या वर्चुअल अदालत (यातायात) की वेबसाइट पर ऑनलाइन भुगतान करना पड़ता है। याचिका में कहा गया कि इससे अदालतों पर भी बहुत बोझ बढ़ गया है।

इसके जवाब में दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी और अधिवक्ता अरुण पंवार ने कहा, ‘‘मोटर वाहन (एमवी) अधिनियम की धारा 200 के संदर्भ में विशेष सचिव (परिवहन) केके दहिया द्वारा अधिसूचना 13 मार्च, 2020 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के उपराज्यपाल के नाम पर पहले ही जारी की जा चुकी है।’’

सरकार के जवाब पर गौर करते हुए पीठ ने कहा कि आगे और आदेश पारित करने की जरूरत नहीं है। इसी के साथ उच्च न्यायालय ने याचिका का निस्तारण कर दिया।

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