जयपुर/चेन्नई, 17 मई राजस्थान में खासकर राजधानी जयपुर की जेलों मे कोरोना वायरस संक्रमण फैलने से चिंता बढ़ गई है। इस बीच देश की विभिन्न जेलों से अधिकारियों ने भीड़भाड़ कम करने के लिए हजारों कैदियों को छोड़ा है ताकि ऐसे स्थानों पर संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद मार्च के अंतिम हफ्ते से एहतियाती तौर पर कैदियों को जेलों से छोड़ना शुरू किया गया था और अगले कुछ दिनों में और कैदी बाहर आ सकते हैं। उन्हें जमानत या पैरोल शुरुआत के 45 से 60 दिन के लिए दी जा रही है और यह अवधि बढ़ाई जा सकती है।
मालूम हो कि कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर मार्च के दूसरे पखवाड़े में उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे उच्च स्तरीय समितियों का गठन कर जेलों में भीड़ कम करने के लिए सात साल की जेल की अवधि वाले कैदियों और विचाराधीन कैदियों को पैरोल या अंतरिम जमानत पर रिहा करने पर विचार करें।
शीर्ष अदालत ने 23 मार्च को कहा था कि जेलों में भीड़भाड़ चिंता का विषय है और कहा कि ‘‘कैदियों के लिए सामाजिक दूरी का पालन कठिन है।’’
राजधानी जयपुर की जिला जेल और केन्द्रीय कारागृह में 140 से अधिक कैदियों और कर्मचारियों में कारोना वायरस संक्रमण की पुष्टि होने के बाद राजस्थान की अन्य जेलों में बंदियों के नमूने रैंडम तरीके से लिये जाने के बारे में सोमवार को निर्णय होने की संभावना है।
एक शीर्ष जेल अधिकारी ने बताया कि जयपुर की जिला जेल में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले सामने आने के बाद जेल प्रशासन ने सभी कैदियों और कर्मियों के नमूने जांच के लिये भेजे है और अब जयपुर की केन्द्रीय जेल में भी रैंडम रूप से नमूने लिए जाएंगे।
जयपुर जिला जेल के अधीक्षक और 133 कैदी कोरोना वायरस संक्रमित पाये गये हैं। जयपुर केन्द्रीय जेल में भी कुछ कैदियों में संक्रमण पाया गया है।
अधिकारी ने बताया कि राज्य के 156 कैदियों को पैरोल पर रिहा किया जा चुका है जबकि 21 कैदियों की पैरोल की अवधि बढ़ा दी गई है और 11 कैदियों की जेल की सजा को कम करके उन्हें रिहा कर दिया गया है।
पुलिस महानिदेशक (जेल) एन आर के रेड्डी ने बताया कि जयपुर की जिला जेल के सभी कैदियों और कर्मियों के नमूनों की जांच की गई है। इस जिला जेल में अभी तक 133 कैदी और जेल अधीक्षक कोरोना वायरस से संक्रमित पाये गये है। जयपुर के केन्द्रीय कारागृह के एक वार्ड में भी वायरस संक्रमण के कुछ मामले सामने के बाद अब अन्य वार्डो में भी रैंडम तरीके से नमूने लेने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने बताया कि जयपुर जिला जेल में अप्रैल की शुरूआत में एक कैदी संक्रमित पाया गया था। उसे शुरूआत के दिनों में पृथक रखा गया।
इसी दौरान जेल अधीक्षक और अन्य कैदी संक्रमित हो गये।
आगरा केंद्रीय जेल में कोविड-19 से एक कैदी की मौत के बाद एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश जेल प्रशासन एवं सुधार विभाग ने राज्य की सभी जेलों से नमूने लेकर कोरोना वायरस संक्रमण की जांच शुरू कर दी है।
विभाग के डीजी आनंद कुमार ने बताया कि आठ मई को कैदी की मौत हुई थी। उसके बाद से 14 कैदियों को पृथक किया गया है।
उन्होंने बताया कि जिस बैरक में उस कैदी को रखा गया था उसकी जिम्मेदारी जिन 13 जेल अधिकारियों की थी, उनकी भी जांच की जा रही है।
कुमार ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 71 जेलें संचालित हैं जिनमें 94,000 से अधिक कैदी हैं। अब तक 16,000 से अधिक कैदियों को या तो जमानत पर या पैरोल पर रिहा कर दिया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘आज भी जेलों में 94,000 कैदी हैं जबकि क्षमता 60,000 कैदियों की है। जेलों में भीड़भाड़ परेशानी की बात है। अब भी जेलों में क्षमता से 1.5 गुना अधिक कैदी हैं।’’
पंजाब की जेल में कोविड-19 के पहले मामले में, लुधियाना की जेल की 48 वर्षीय महिला कैदी संक्रमित पाई गई है। उसे 28 अप्रैल को संगरूर जेल से यहां लाया गया था।
एक अधिकारी ने बताया कि पंजाब सरकार ने अब तक जेलों से 9,773 कैदियों को रिहा किया है।
राष्ट्रीय राजधानी में, रोहिणी जेल में कोरोना वायरस का मामला सामने आने के बाद से अधिकारी काफी सतर्क हैं। दिल्ली में तीन जेल हैं -- तिहाड़, रोहिणी और मंडोली। रोहिणी जेल के 28 वर्षीय व्यक्ति में कोरोना वायरस की पुष्टि होने के बाद उसके साथ बैरक साझा करने वाले 15 अन्य कैदियों तथा हेड वार्डन में भी संक्रमण हो गया।
एक बैरक में सामान्यत: 20 से 25 कैदी होते हैं। सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए जेलों में भीड़भाड़ कम करने के कदम उठाए जा रहे हैं। अभी तक 3,500 कैदियों को रिहा किया गया है और आगामी दिनों में और कैदियों को रिहा किया जाएगा।
जेल अधिकारियों ने कहा कि मार्च में जब उन्होंने जेलों में भीड़भाड़ कम करने के लिए कदम उठाने शुरू किए थे जब इन तीन जेलों में कैदियों की संख्या 17,500 थी, जबकि इनकी क्षमता 10,000 कैदियों की है।
अब इन जेलों में लगभग 14,200 कैदी हैं तथा और कैदियों को छोड़ने की प्रक्रिया चल रही है।
महाराष्ट्र में जेलों में भीड़ कम करने के लिए अब तक 7,200 से ज्यादा कैदियों को रिहा किया जा चुका है।
अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि करीब 10,000 और कैदियों को जल्द रिहा किया जाएगा।
कारावास विभाग के एक अधिकारी ने पीटीआई- से कहा कि लॉकडाउन से पहले राज्य की 60 जेलों में 35,000 से ज्यादा कैदी थे और हमने 7,200 से अधिक कैदियों को अस्थायी रूप से छोड़ दिया है ताकि जेलों में भीड़ कम हो जाए। "
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