देश की खबरें | ओडिशा : केंद्रपाड़ा के निवासियों ने महात्मा गांधी की ऐतिहासिक पदयात्रा को याद किया

केंद्रपाड़ा (ओडिशा), 15 अगस्त देश के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ओडिशा के लोगों ने महात्मा गांधी की ऐतिहासिक पदयात्रा को याद किया। नौ दशक पहले बापू ने तटीय जिले केंद्रपाड़ा समेत राज्य के कई हिस्सों में पैदल यात्रा की थी।

केंद्रपाड़ा के एक शोधार्थी डॉ. बासुदेब दास ने बताया कि अस्पृश्यता के खिलाफ संदेश देने के लिए राष्ट्रपिता ने 1934 में पदयात्रा के दौरान कुछ गांवों में दलितों को मंदिरों में प्रवेश करने की अनुमति दी थी।

दास ने कहा, ‘‘बापू की पदयात्रा देश के स्वतंत्रता संग्राम में सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक थी।’’

इस पदयात्रा के दौरान महात्मा गांधी ने केंद्रपाड़ा जिले में चार दिन बिताए थे और विभिन्न स्थानों का दौरा किया था।

गांधी ने 30 मई 1934 को धुमत गांव में एक पत्थर पर बैठकर स्नान किया था। गांववासी उनके लिए नजदीकी नदी से बाल्टियों में पानी भरकर लाए थे। जिस पत्थर पर बैठकर उन्होंने स्नान किया था उसे ‘गांधी शिला’ के नाम से जाना जाता है और वहां उनकी एक आवक्ष प्रतिमा भी स्थापित है।

धुमत गांव की कॉलेज छात्रा अनुराधा मोहंती ने कहा, ‘‘न तो मैंने और न ही मेरे पिता ने महात्मा गांधी को देखा था। लेकिन हम गांधी शिला की पूजा करते हैं। मेरे दादा मुझे बताते थे कि गांधी जी कैसे हमारे इलाके में आए थे और स्थानीय लोगों के बीच उन्होंने स्वतंत्रता की भावना जगायी थी।’’

पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत हरेकृष्ण महताब की पुस्तक ‘‘हिस्ट्री ऑफ ओडिशा’’ में राज्य में गांधी की पदयात्रा का विवरण दिया गया है।

केंद्रपाड़ा शहर के 30 वर्षीय पेशेवर मनाबेश राउत ने कहा, ‘‘जिन लोगों ने यात्रा में भाग लिया या उसे देखा, वे बापू के व्यक्तित्व के बारे में बताने के लिए जीवित नहीं हैं। लेकिन उस महान व्यक्ति ने केंद्रपाड़ा की धरती पर अपने कदम रखे थे, यह बात हमें गौरवान्वित करती है।’’

महात्मा गांधी की 1934 में ऐतिहासिक पदयात्रा का जश्न मनाने के लिए केंद्रपाड़ा शहर के तिनीमुहानी चौक पर हाल में महात्मा गांधी के साथ अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमा का अनावरण किया गया।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)