भुवनेश्वर, सात मार्च ओडिशा सरकार ने छात्रों के हितों की रक्षा और केआईआईटी विश्वविद्यालय परिसर में उचित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने के लिए प्रोफेसरों की एक समिति गठित की है। उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने शुक्रवार को विधानसभा में यह जानकारी दी।
राज्य सरकार ने भुवनेश्वर में केआईआईटी विश्वविद्यालय परिसर में एक नेपाली छात्र की मौत के कुछ दिनों बाद यह समिति गठित करने की घोषणा की है।
उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि सरकार ने स्नातक छात्रा की मौत और उसके बाद केआईआईटी विश्वविद्यालय के नेपाली छात्रों पर हुए हमले के संबंध में निजी संस्थान के छह और अधिकारियों को भी बयान दर्ज करने के लिए बुलाया है।
मंत्री ने कांग्रेस विधायक ताराप्रसाद बहिनीपति के लिखित प्रश्न का जवाब देते हुए यह जानकारी दी।
कांग्रेस विधायक ने पूछा कि 20 वर्षीय नेपाली छात्रा प्रकृति लामसाल की मौत और उसके बाद केआईआईटी परिसर में हुए उपद्रव के बाद राज्य सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।
लामसाल का शव 16 फरवरी की शाम को विश्वविद्यालय परिसर से बरामद किया गया था।
मंत्री ने कहा, ‘‘छात्रों के शैक्षणिक हितों की रक्षा और कक्षाएं सुचारू रूप से शुरू करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने एक विशेष समिति गठित की है, जिसमें उत्कल विश्वविद्यालय के दो और रमा देवी महिला विश्वविद्यालय के दो वरिष्ठ प्रोफेसर शामिल हैं। इस समिति के सदस्य शैक्षणिक माहौल की निगरानी के लिए अगले तीन महीनों तक हर 15 दिन में केआईआईटी का दौरा करेंगे और बाद में हर महीने परिसर का दौरा करेंगे।’’
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने केआईआईटी घटनाओं की जांच के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन पहले ही कर दिया है।
केआईआईटी के संस्थापक अच्युत सामंत सहित 14 शीर्ष अधिकारियों ने समिति के समक्ष अपनी गवाही दी है।
समिति में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा उच्च शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव भी शामिल हैं।
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