भुवनेश्वर, सात अगस्त ओडिशा के कोणार्क जिले के एक गांव में 25 साल के एक युवक का शव उसके घर पर 15 घंटे से अधिक समय तक रखा रहा लेकिन मृतक के परिजन और गांव वालों ने कोरोना वायरस संक्रमण की आशंका के चलते उसका अंतिम संस्कार नहीं किया।
अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
उक्त व्यक्ति की मौत मंकरागोराड़ी गांव में बुधवार को हुई।
शव को अंतिम संस्कार के लिए गांव के बाहर ले जाने से पहले मृतक के परिजन को पीपीई किट और अन्य सुरक्षा उपकरण की व्यवस्था करने के लिए मजबूर किया गया।
संक्रमण की आशंका के चलते कोई भी मृतक की अर्थी को कंधा देने के लिए तैयार नहीं था।
शव को अगले दिन ठेले पर रखकर श्मशान ले जाया गया।
अधिकारियों ने कहा कि मृतक का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार की दोपहर को किया गया।
क्षेत्र के निवासी ट्रैक्टर चालक विचित्र राउत पिछले कुछ दिनों से तेज बुखार से पीड़ित था। डॉक्टर के अनुसार उसे टायफाइड हो गया था।
राउत के परिवार के सदस्यों ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ने उसे कोविड-19 की जांच कराने को कहा।
राउत अपने माता पिता की इकलौती संतान था और परिवार का पेट पालने की जिम्मेदारी उस पर थी।
उसे जांच के लिए पुरी स्थित जिला मुख्यालय अस्पताल रेफर किया गया था लेकिन अस्पताल की ओपीडी बंद होने के कारण उसकी जांच नहीं हो सकी।
इसके बाद राउत को भुवनेश्वर रेफर किया गया लेकिन वहां जाने से पहले ही बुधवार को उसकी मौत हो गई।
तब तक यह अफवाह फैल गई कि राउत कोरोना वायरस संक्रमण का शिकार हो गया था।
अफवाह के चलते गांव वालों ने उसके परिवार से दूरी बना ली।
कोणार्क अधिसूचित क्षेत्र परिषद (एनएसी) के कार्यकारी अधिकारी एम श्रीनिवास ने पीटीआई- से कहा कि जब उन्हें मामले की जानकारी मिली तो उन्होंने कुछ अधिकारियों को पीपीई किट के साथ गांव भेजा।
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