नयी दिल्ली, 16 जून टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) की स्थायी तकनीकी उप-समिति (एसटीएससी) ने बृहस्पतिवार को कोविड-19 टीकों की दूसरी और एहतियाती खुराक के बीच के अंतर को मौजूदा नौ से छह महीने तक कम करने की सिफारिश की। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय अनुशंसा पर जल्द ही अंतिम फैसला लेगा।
सरकारी सलाहकार समिति की बृहस्पतिवार को हुई बैठक में प्राथमिक टीकाकरण में लगाए गए कोविड रोधी टीके से अलग टीके की एहतियाती खुराक के तौर पर इस्तेमाल की व्यवहार्यता को लेकर वेल्लोर में क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) द्वारा किए गए एक अध्ययन के निष्कर्षों की भी समीक्षा की।
सूत्रों ने बताया कि एनटीएजीआई की समिति ने मंकीपॉक्स के खतरे और टीकाकरण की आवश्यकता पर भी बैठक में चर्चा की।
समिति के सदस्यों ने एहतियाती खुराक के लिए टीकों के मिश्रण पर परिणामों में एकरूपता की कमी पाई और कहा कि इसके लिए अभी कोई सिफारिश नहीं की जा सकती है। सीएमसी का अध्ययन कोविशील्ड और कोवैक्सीन पर था।
बैठक में मंकीपॉक्स के खतरे और टीकाकरण की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
सूत्रों में से एक ने ‘पीटीआई-’ को बताया, “हालांकि, सदस्यों का मानना था कि अभी कड़ी निगरानी की जरूरत है। देश में अब तक मंकीपॉक्स का कोई मामला सामने नहीं आया है।”
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