नयी दिल्ली, 17 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले भारतीय हिमालयी क्षेत्र की वहन क्षमता और मास्टर प्लान के आकलन के अनुरोध संबंधी याचिका पर केंद्र और अन्य से शुक्रवार को जवाब मांगा।
प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला की पीठ ने एक पूर्व आईपीएस अधिकारी द्वारा दायर याचिका पर भारत संघ, जल शक्ति मंत्रालय और अन्य को नोटिस जारी किया।
पीठ ने कहा, ‘‘नोटिस का जवाब चार सप्ताह में दिया जाये।’’
जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, शीर्ष अदालत ने याचिका पर विचार करने के लिए अनिच्छा व्यक्त की और याचिकाकर्ता को राष्ट्रीय हरित अधिकरण के पास जाने को कहा।
पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील आकाश वशिष्ठ से कहा, ‘‘आप एनजीटी के पास क्यों नहीं जाते हैं और अपनी शिकायतों को उसके समक्ष क्यों नहीं रखते हैं?’’
वकील ने तर्क दिया कि एनजीटी अधिनियम की धारा 14 के तहत रोक है क्योंकि पर्यावरण उल्लंघन का एक विशिष्ट मामला होना चाहिए।
वकील के बार-बार कहने पर पीठ ने नोटिस जारी किया।
शीर्ष अदालत अशोक कुमार राघव द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें भारतीय हिमालयी क्षेत्र के लिए तैयार की गई वहन क्षमता और ‘मास्टर प्लान’ के आकलन का अनुरोध किया गया है।
याचिका में कहा गया है, ‘‘वहन क्षमता का अध्ययन न होने के कारण, जोशीमठ में भूस्खलन, भू-धंसाव और भू-कटाव जैसे गंभीर भूगर्भीय खतरे देखे जा रहे हैं और पहाड़ियों में गंभीर पारिस्थितिकीय और पर्यावरणीय क्षति हो रही है।’’
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