जरुरी जानकारी | कर्ज पुनर्गठन के लिये बहुत ज्यादा मांग नहीं: एसबीआई् चेयरमैन

नयी दिल्ली, 22 सितंबर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि बाजार की उम्मीदों के विपरीत कर्ज पुनर्गठन की बहुत ज्यादा मांग नहीं है। आरबीआई ने हाल ही में कर्जदारों को कोविड-19 संकट से पार पाने में मदद के लिये कर्ज पुनर्गठन की अनुमति दी है।

उन्होंने कहा कि 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक कर्ज के पुनर्गठन की संभावना नहीं है। हालांकि, लोगों ने इसके करीब 8 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था।

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कुमार ने कहा, ‘‘बैंक के हिसाब से देखा जाए तो बहुत ज्यादा मांग नहीं है। जो एक चर्चा थी, स्थिति उसके उलट हो सकती है। इसके कई कारण हो सकते हैं। एक वजह यह है कि पहले ही इस संदर्भ में काम हो चुके हैं। सबसे महत्वपूर्ण कंपनियां इस बात को लेकर तैयार नहीं हैं कि उनका नाम पुनर्गठन से जुड़े। यह चीज मैं महसूस कर रहा हूं।’’

उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में बड़ी कंपनियों में निचले क्रम की इकाइयां और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम) में उच्च क्रम में आने वाली इकाइयों में कर्ज पुनर्गठन की जरूरत हो सकती है।

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उन्होंने कहा कि पुनर्गठन के तहत 25 करोड़ रुपये से अधिक और 400 करोड़ रुपये से नीचे के कर्ज को लेकर पुनर्गठन के लिये इकाइयां आएंगी। लेकिन अब तक बहुत ज्यादा ने इसको लेकर रूचि नहीं दिखायी है।

रिजर्व बैंक ने पिछले महीने कंपनियों और खुदरा दोनों तरह के ऋणों को उन्हें एनपीए (फंसे कर्ज) की श्रेणी में डाले बिना एक बारगी पुनर्गठन की मंजुरी दे दी। पुनर्गठन का लाभ वे इकाइयां ले सकती हैं जो एक मार्च तक कर्ज लौटा रहे थे और जिनकी कर्ज चुकाने में 30 दिन से अधिक की देरी नहीं हुई है।

कुमार ने कहा कि आर्थिक वृद्धि के पटरी पर आने में बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण होने जा रहा है। पांच साल में 110 लाख करोड़ रुपये के निवेश योजनाएं पाइपलाइन में हैं।

उन्होंने कहा कि बैंक क्षेत्र के पास बचतकर्ताओं और कर्जदारों के बीच मध्यस्थता करने की जिम्मेदारी होगी। बैंकों के समक्ष चुनौतियों के बारे में एसबीआई प्रमुख ने कहा कि पूंजी, संचालन, फंसे कर्ज को लेकर जोखिम कुछ चुनौतियां हैं। इन जोखिमों को कम करने के लिये कदम उठाने की जरूरत है।

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