बुरहानपुर (मप्र), 24 मई कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए आमंत्रित नहीं करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न केवल उनका बल्कि देश के आदिवासी समुदाय का अपमान किया है।
नए संसद भवन का उद्घाटन 28 मई को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किया जाना है और अब तक 19 विपक्षी दलों ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार करने की घोषणा की है।
सिंह ने मध्य प्रदेश के बुरहानपुर शहर में पत्रकारों से कहा, ‘‘आदिवासी समुदाय से संबंधित राष्ट्रपति को आमंत्रित न करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनका अपमान किया है। उन्होंने न तो नए संसद भवन का शिलान्यास किया और न ही उन्हें 28 मई को इसके उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया। यह राष्ट्रपति का अपमान है और देश के आदिवासी समुदाय और उन नागरिकों का भी जो भारतीय संविधान में आस्था रखते हैं।’’
प्रधानमंत्री मोदी का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा, ‘‘उनका अहंकार और आत्म गौरव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। यहां तक कि उन्होंने नवीनीकरण के बाद अहमदाबाद के सरदार पटेल स्टेडियम का नाम भी बदल दिया। उनमें (प्रधानमंत्री में) बहुत अहंकार है, वह अहंकारी हैं जो हमेशा खुद को भगवान के रुप में पेश करना चाहते हैं।’’
राज्यसभा सांसद ने कहा कि वर्तमान संसद परिसर एक विरासत भवन है जिसमें सभी आवश्यक व्यवस्था हैं। अगर उस परिसर में कोई कमी थी तो उसका जीर्णोद्धार किया जा सकता था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने नए संसद भवन पर हजारों करोड़ रुपये खर्च कर दिए।
उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 75 के अनुसार संसद का प्रमुख राष्ट्रपति होता है तथा संसद उन्हीं के अधीन चलती है।
कांग्रेस, वामपंथी, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), और आम आदमी पार्टी (आप) सहित 19 दलों ने बुधवार को नयी संसद के उद्घाटन कार्यक्रम का बहिष्कार करने के अपने फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि लोकतंत्र की आत्मा को चूस लिया गया है तो उन्हें नयी इमारत का कोई महत्व नहीं लगता है।
दो हजार रुपये के नोट को चलन से वापस लेने के फैसले की आलोचना करते हुए सिंह ने सरकार से कहा कि वह पहले लोगों को बताए कि इसे क्यों पेश किया गया और नोटबंदी क्यों की गई।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि सात साल पहले पेश किए गए दो हजार रुपये के नोट को वापस क्यों लिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इसे डिजाइन करने और इसे पेश करते समय एटीएम मशीनों में बदलाव करने पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
उन्होंने जानना चाहा कि उस समय (नोटबंदी के समय) जो वादा किया गया था, क्या काला धन सिस्टम से गायब हो गया?
बुरहानपुर के बारे में बात करते हुए सिंह ने कहा कि यह क्षेत्र केले की खेती के लिए जाना जाता है लेकिन दुर्भाग्य से सरकार इस फसल को अपनी बीमा योजना के तहत कवर नहीं कर रही है, ताकि किसानों को होने वाले नुकसान की स्थिति में किसानों को मुआवजा दिया जा सके, जबकि पड़ोसी महाराष्ट्र में इसका भुगतान किया जा रहा है।
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