श्रीनगर, सात फरवरी चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों के साथ पूर्वी लद्दाख के गलवान में हुई झड़प में शामिल रहीं सेना की इकाइयों को यहां मंगलवार को उत्तरी कमान के अलंकरण समारोह में काफी संख्या में प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
देश की आजादी के बाद कश्मीर में पहली बार इस समारोह का आयोजन किया गया।
भारतीय थलसेना के उत्तरी कमान के ‘जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ’ लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘श्रीनगर में अलंकरण समारोह के प्रथम हिस्से की अध्यक्षता करना मेरे लिए एक असीम सम्मान का विषय है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य, एलओसी(नियंत्रण रेखा) और एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर स्थिरता के लिए योगदान देने वाले उत्तरी कमान की चयनित इकाइयों की बहादुरी के प्रेरणादायी कारनामों, प्रतिबद्धता और बलिदान की सराहना करना है।’’
कार्यक्रम में प्रदान किये गये चार ‘चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ’ प्रशस्ति पत्र में तीन पत्र, जून 2020 में गलवान झड़प के बाद लद्दाख सेक्टर में चलाये गये ‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’ में शामिल रहीं इकाइयों को प्रदान किये गये।
जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ के 49 प्रशस्ति पत्रों में 18, लद्दाख में तैनात सेना की इकाइयों को दिये गये, जबकि 24 प्रशस्ति पत्रों में करीब आधे भी उन्होंने अपने नाम कर लिये।
वहीं, 6 बिहार इकाई को गलवान घाटी में दुश्मन को पीछे धकेलने में अभूतपूर्व योगदान देने के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया, जबकि ‘22 जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स’ को चुशूल सेक्टर में चीनी घुसपैठ नाकाम करने के लिए प्रशस्ति पत्र दिया गया।
‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’ में भाग लेने वाले ‘17 महार’ को आठ महीनों के लिए ऑपरेशन मेघदूत (सियाचिन ग्लेशियर) में तैनात रहे प्रथम बटालियन होने के कारण सम्मानित किया गया।
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