नयी दिल्ली, एक अगस्त उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें नोएडा में कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए सुपरटेक लिमिटेड के 40 मंजिला दो टावर को गिराने की जगह वैकल्पिक समाधान का निर्देश देने का आग्रह किया गया था।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़़ और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने एनजीओ ‘सेंटर फॉर लॉ एंड गुड गवर्नेंस’ पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया और निर्देश दिया कि इस राशि को रजिस्ट्री में जमा किया जाए, ताकि कोविड से प्रभावित रहे वकीलों के परिजनों के लाभ के लिए इसका उपयोग किया जा सके।
शुरुआत में, पीठ ने एनजीओ की ओर से पेश वकील को चेतावनी दी कि यदि वह जनहित याचिका पर आगे बढ़ते हैं तो वह याचिकाकर्ता पर भारी शुल्क लगाएगी।
शीर्ष अदालत ने कहा कि पिछले साल 31 अगस्त को टावर गिराए जाने का आदेश पारित किया गया था और पुनरीक्षण याचिका भी खारिज होने के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया।
पीठ ने कहा, "टावर गिराने का आदेश दिया गया था, क्योंकि वे भवन नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए थे।"
इसने वकील से कहा कि जनहित याचिका ऐसा निर्देश चाहती है, जो इस अदालत के आदेश के विपरीत है।
पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।
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