नयी दिल्ली,16 मई तमिलनाडु सरकार ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के प्रदर्शन पर ‘‘प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष प्रतिबंध’’ लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया है।
तमिलनाडु सरकार ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सिनेमाघरों को जरूरी सुरक्षा मुहैया कराए जाने के बावजूद उनके मालिकों ने सात मई से इस फिल्म को नहीं दिखाने का निर्णय किया, क्योंकि उन्हें जनता से इसके प्रति उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
राज्य सरकार ने फिल्म निर्माताओं की ओर से दाखिल एक याचिका के जबाव में कहा कि आपत्तियों और प्रदर्शनों के बावजूद राज्य भर में पांच मई को 19 मल्टीप्लेक्स में फिल्म रिलीज की गई थी। फिल्म निर्माताओं का आरोप है कि राज्य में फिल्म के प्रदर्शन पर वस्तुत: प्रतिबंध है।
राज्य सरकार ने कहा, ‘‘फिल्म के प्रदर्शन के बाद उसकी भारी आलोचना हुई थी और कुछ मुस्लिम संगठनों ने आरोप लगाया था कि फिल्म ‘मुसलमान समुदाय के प्रति घृणा’ और आम जनता में ‘इस्लाम को लेकर भय’ फैलाती है और अन्य धर्मों के लोगों को मुसलमानों के खिलाफ ध्रुवीकृत करने के उद्देश्य से इसे बनाया गया है।’’
राज्य सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल याचिका के सुनवाई योग्य होने पर सवाल उठाते हुए कहा,‘‘ यह कहा जाता है कि तमिलनाडु सरकार ने फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने के कोई आदेश जारी नहीं किए हैं...।’’
भारत के संविधान का अनुच्छेद 32 किसी व्यक्ति को उस सूरत में उच्चतम न्यायालय का रुख करने का अधिकार देता है, जब उसे लगता है कि उसके मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है।
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