नयी दिल्ली, 20 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दूरसंचार कंपनियों से दो टूक शब्दों में कहा कि वह समायोजित सकल राजस्व से संबंधित बकाये के पुन: आकलन के बारे में चंद सेकेण्ड के लिये भी दलीलें नहीं सुनेगा। समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) की राशि करीब 1.6 लाख करोड़ रूपए है।
न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने दूरसंचार कंपनियों द्वारा समायोजित सकल राजस्व से संबंधित बकाये के भुगतान की समय सीमा के मसले पर सुनवाई पूरी कर ली। पीठ इस पर अपना फैसला बाद में सुनायेगी।
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पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से इस प्रकरण की सुनवाई के दौरान कहा, ‘‘हम पुन: आकलन (समायोजित सकल राजस्व से संबंधित बकाया) पर एक सेकेण्ड भी बहस नहीं सुनेंगे।’’
इससे पहले, केन्द्र ने न्यायालय से अनुरोध किया था कि इन दूरसंचार कंपनियों को एजीआर से संबंधित बकाया राशि के भुगतान के लिए 20 साल का समय दे दिया जाये।
इस मामले में सोमवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि 15-20 साल का समय तर्कसंगत अवधि नहीं है और दूरसंचार कंपनियों को एक व्यावहारिक समय बताना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने कहा कि दिवालिया प्रक्रिया के लिये जा रही कुछ दूरसंचार कंपनियों की नेक नीयति के पहलू पर वह विचार करेगी।
शीर्ष अदालत को 18 जून को केन्द्र ने सूचित किया था कि दूरसंचार विभाग ने गेल जैसे गैर-संचार सार्वजनिक उपक्रमों से एजीआर से संबंधित बकाया राशि के रूप में चार लाख करोड़ रू के भुगतान की मांग में से 96 फीसदी मांग वापस लेने का फैसला किया है।
न्यायालय ने भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया जैसी निजी संचार कंपनियों से कहा था कि वे इस बकाया राशि के भुगतान के बारे में तर्कसंगत योजना पेश करें और अपनी नेकनीयती का परिचय देने के लिये इस रकम में से कुछ राशि का भुगतान करें तथा पिछले दस साल के अपने खाते पेश करें।
ा अनूप
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