देश की खबरें | एनएलएसआईयू बेंगलुरु द्वारा एनएलएटी-2020: झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 14 सितंबर एनएलएसआईयू, बेंगलुरू द्वारा अलग से प्रवेश परीक्षा एनएलएटी-2020 आयोजन को चुनाती देने वाली याचिका झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा खारिज किये जाने के खिलाफ अब उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की गयी है।

उच्च न्यायालय ने11 सितंबर को एनएलएसआईयू , बेंगलुरू द्वारा बीए एलएलबी के पांच साल के कार्यक्रम के लिये अलग से प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। इस परीक्षा का आयोजन 12 सितंबर को होना था।

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शीर्ष अदालत ने भी 11 सितंबर को दो अन्य याचिकाओं पर एनएलएसआईयू को अलग से परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी थी लेकिन उसने विश्वविद्यालय को याचिका के निपटारे तक इसके नतीजे घोषित करने तथा किसी भी छात्र को प्रवेश देने से रोक दिया था।

पीठ ने एनएलएसआईयू के फैसले के खिलाफ एनएलएसआईयू के पूर्व कुलपति प्रो आर वेंकट राव और एक छात्र के पिता राकेश कुमार अग्रवाल की याचिका पर अंतरिम आदेश के साथ ही कहा था कि यह महत्वपूर्ण मामला है जिस पर फैसले की जरूरत है। इस याचिका पर 16 सितंबर को आगे सुनवाई होनी है।

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उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर अपील में इस याचिका का निबटारा होने तक एनएलएटी-2020 के आधार पर एनएलएसआईयू में प्रवेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। अपील दायर करने वाले छात्र हैं जो कानून की पढ़ाई के लिये प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।

अपील में कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने इस तथ्य की अनदेखी की कि एनएलएसआईयू द्वारा बेहद कम समय में क्लैट से अलग एक नये तरीके से एनएलएटी-2020 प्रवेश परीक्षा का आयोजन करना तर्कसंगत नहीं था।

अपील में आरोप लगाया गया है कि एनएलएसआईयू, बेंगलुरू का क्लैट से इतर प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के निर्णय से न्यायोचित और निष्पक्ष तरीके से परीक्षा के छात्रों के अधिकारों का हनन हुआ है।

शीर्ष अदालत में पहले से ही लंबित प्रो राव और अन्य की याचिका में इस विश्वविद्यालय में प्रवेश परीक्षा अलग से कराने संबंधी अधिसूचना को पूरी तरह मनमाना और गैरकानूनी फैसला बताया है। याचिका में कहा गया है कि एनएलएसयूआई की इस कार्रवाई ने एक अप्रत्याशित अनिश्चितता पैदा कर दी है और छात्रों पर भी अनावश्यक बोझ डाल दिया है जो अब भावी कार्यक्रम को लेकर अनिश्चय की स्थिति में हैं।

याचिका के मुताबिक नये प्रवेश परीक्षा के रूप में नेशनल लॉ एप्टीट्यूड परीक्षा कराने का निर्णय बगैर किसी सोच विचार के लिया गया है और सनक भरी वजहों से लिये गये इस निर्णय ने अंतिम क्षणों में छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया है।

याचिका में कहा गया है कि कुलपति प्रो सुधीर कृष्णस्वामी का यह निर्णय इसे सिर्फ कुलीन संस्था बनाने के इरादे से लिया गया फैसला है जो सिर्फ उन लोगों के हित साधेगा जो परीक्षा मे शामिल हो सकेंगे जबकि इसने तमाम गरीब, सीमांत और उपेक्षित प्रत्याशियों की पूरी तरह अनदेखी की है।

अनूप

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