नयी दिल्ली, 23 दिसंबर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार व्यापार के जरिए आतंकवाद का वित्त पोषण करने के मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ शुक्रवार को आरोप पत्र दाखिल गया।
यह मामला 16 दिसंबर 2016 को स्वत: संज्ञान लेकर दर्ज किया गया था।
एनआईए के एक प्रवक्ता ने बताया कि आरोपियों- पुलवामा के तनवीर अहमद वानी और बारामूला के पीर अरशद इकबाल एवं बशीर अहमद सोफी - के खिलाफ एक विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया और उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता और अवैध गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
प्रवक्ता ने कहा कि यह मामला जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के बीच नियंत्रण रेखा के जरिए व्यापार के माध्यम से मुनाफाखोरी और धन हासिल करके जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उसका उपयोग करने से संबंधित है।
नियंत्रण रेखा के पार व्यापार कश्मीर में बारामूला जिले के उरी में सलामाबाद और जम्मू क्षेत्र के पुंछ में चक्कन-दा-बाग में स्थित दो व्यापार सुविधा केंद्रों (टीएफसी) के माध्यम से 2008 में शुरू किया गया था।
व्यापार तंत्र की मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार, 21 वस्तुओं को पीओके से आयात करने और जम्मू-कश्मीर से निर्यात करने की अनुमति दी गई थी। यह वस्तु विनिमय प्रणाली पर आधारित थी और पैसे का कोई लेन-देन शामिल नहीं था।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘कई दस्तावेजों की जांच-पड़ताल के बाद यह पता चला कि व्यापारियों द्वारा आयात किए गए बादाम की कीमत कम दिखाकर और अत्यधिक आयात करके असाधारण मुनाफा कमाया गया।”
इस व्यापार प्रणाली को अप्रैल 2019 में निलंबित कर दिया गया था।
प्रवक्ता ने बताया कि जांच में पता चला है कि आरोपी वानी और इकबाल नियंत्रण रेखा के पार व्यापार करते थे और अपने, अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और कर्मचारियों के नाम पर पंजीकृत कई व्यापारिक कंपनियों को संभाल रहे थे।
अधिकारी ने कहा, ‘‘दोनों ने निर्यात की तुलना में अधिक आयात करके और नियंत्रण रेखा के पार पीओके से आयातित बादाम की कम कीमत का बिल बनाकर आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन जुटाया।’’
एनआईए ने कहा कि जांच से पता चला है कि दोनों आरोपियों के पीओके स्थित सीमा पार हिज्ब-उल-मुजाहिदीन के आतंकवादियों के साथ व्यापारिक संबंध भी थे।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘आतंकवादी गतिविधियों के लिए निधि जुटाने के बाद, वानी ने हिज्ब-उल-मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद और अन्य संगठनों के विभिन्न आतंकवादियों को नकद में धन उपलब्ध कराया था। आरोपी इकबाल हिज्ब-उल-मुजाहिदीन के पूर्व आतंकवादी सोफी को धन मुहैया कराता था।’’
सिम्मी नोमान
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