नयी दिल्ली, 17 जून राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तरप्रदेश के इटावा और जालौन जिलों में नदी की तलहटी में अवैध बालू खनन पर गौर करने के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में एक कमेटी बनाने को कहा है ।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल के नेतृत्व वाली पीठ ने उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एसवीएस राठौड़ की अध्यक्षता में गठित निरीक्षण समिति को संबंधित जिलाधिकारियों या किसी अन्य प्रशासनिक जरिए से तथ्यों का पता लगाने को कहा है ।
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समिति को ई-मेल के जरिए 23 सितंबर के पहले मामले में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है ।
न्यायाधिकरण ने उल्लेख किया कि राज्य पर्यावरण असर आकलन प्राधिकरण, उत्तरप्रदेश और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पर्यावरण विभाग के उपनिदेशक की पूर्व की रिपोर्ट में कहा गया कि कोई अवैध खनन नहीं हुआ है। याचिकाकर्ता ने इस रिपोर्ट को चुनौती दी है ।
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पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता ने उपरोक्त रुख पर एक हलफनामा दाखिल किया है । इसमें कहा गया है कि अभी तक अवैध रेत खनन हो रहा है। याचिकाकर्ता ने अपने दावे के समर्थन में अखबार में छपी रिपोर्ट को भी संलग्न किया है। खबर में कहा गया है कि अवैध खनन के लिए 10 कांस्टेबल के खिलाफ कार्रवाई की गयी।’’
एनजीटी ने कहा कि हलफनामे को देखते हुए आगे सत्यापन किए बिना राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दाखिल रिपोर्ट को स्वीकार करना मुश्किल है ।
पीठ उत्तरप्रदेश निवासी अजय पांडे तथा अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में उत्तरप्रदेश में इटावा और जालौन जिलों के बीच नदी की तलहटी में अवैध बालू खनन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गयी है।
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