विदेश की खबरें | शांति स्थापित करने की ट्रंप की कोशिशों के बीच गाजा पर बिना किसी समझौते के लौटे नेतन्याहू
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

ट्रंप ने इजराइल और हमास के बीच 60 दिनों के युद्धविराम समझौते की खातिर अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन नेतन्याहू की यात्रा के दौरान इस दिशा में किसी सफलता की घोषणा नहीं की गई।

यह एक ऐसे राष्ट्रपति के लिए निराशा की बात है, जो एक शांतिदूत के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं और जिन्होंने अपनी छवि समझौता कराने वाले के रूप में कायम की है।

‘इजराइल पॉलिसी फोरम’ की वाशिंगटन प्रबंध निदेशक और वरिष्ठ फेलो राचेल ब्रैंडेनबर्ग ने कहा, ‘‘उन्हें समझौते करा पाने की अपनी क्षमता पर गर्व है, इसलिए यह एक और परीक्षण का मामला है।’’

इक्कीस महीने से जारी युद्ध में युद्धविराम समझौता कराने की ट्रंप की क्षमता यह दिखाएगी कि नेतन्याहू पर उनका प्रभाव किस हद तक है, खासकर इस सप्ताह व्हाइट हाउस में दोनों नेताओं द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए संयुक्त हमलों का बखान किये जाने के बाद।

इस सप्ताह व्हाइट हाउस में ट्रंप और नेतन्याहू की लगातार बैठकों के अलावा, ऐसे समय में (युद्धविराम पर) प्रगति के सार्वजनिक प्रमाण कम ही मिले, जब रिपब्लिकन अमेरिकी राष्ट्रपति लड़ाई को समाप्त करने के लिए दबाव बना रहे हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बृहस्पतिवार को कहा था कि जहां तक ​​गाजा में युद्धविराम की बात है, तो ‘‘ हम काफी समय से इसके करीब हैं और हमें उम्मीद है, लेकिन हम यह भी मानते हैं कि अभी भी कुछ चुनौतियां हैं।’’

मलेशिया के कुआलालंपुर की यात्रा के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए रुबियो ने यह भी कहा कि ट्रंप ‘युद्धविराम देखना चाहते हैं और हमने इसमें बहुत समय और ऊर्जा लगाई है।’’

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