कासरगोड, 21 दिसंबर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 देश की युवा पीढ़ी की प्रतिभा को निखारने वाला पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए एक सुविचारित रोडमैप है।
कोविंद ने यहां पेरिया परिसर में केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन में कहा कि एनईपी का उद्देश्य छात्रों को कल की दुनिया के लिए तैयार करना है और साथ ही उन्हें भारत की अपनी परंपराओं से भी युक्त करना है।
राष्ट्रपति ने कहा, "आखिरकार, भारत नालंदा और तक्षशिला, आर्यभट्ट, भास्कराचार्य और पाणिनी की भूमि है। गांधीजी ने स्वदेशी शिक्षा प्रणाली की तुलना एक सुंदर पेड़ से की थी, जो उपनिवेशवाद के तहत नष्ट हो गया। इसके सर्वोत्तम पहलुओं को फिर से खोजने का प्रयास किया जा रहा है ताकि भारत दुनिया के लिए एक ऐसा योगदान दे, जो इसे अकेले ही करना है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि एनईपी की सबसे उत्कृष्ट विशेषता यह है कि इसका उद्देश्य समावेश और उत्कृष्टता दोनों को बढ़ावा देना है।
कोविंद ने कहा कि अपने विविध पाठ्यक्रम के माध्यम से एनईपी उदार और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देती है, क्योंकि ज्ञान की प्रत्येक धारा की समाज और राष्ट्र निर्माण में भूमिका होती है।
उन्होंने कहा, "इस तरह, एनईपी भारत के लिए जनसांख्यिकीय लाभांश का दोहन और लाभ उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।"
राष्ट्रपति ने कहा कि देश की बढ़ती आबादी "अगली पीढ़ी की प्रतिभा को पोषित करने के लिए हम पर निर्भर है।"
उन्होंने कहा, "जब युवा पीढ़ी को इक्कीसवीं सदी की दुनिया में सफलता के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान किया जाए, तो वह चमत्कार कर सकती है।"
राष्ट्रपति ने यह भी रेखांकित किया कि केंद्र सरकार ने यूनेस्को के वैश्विक अध्ययन नेटवर्क में सूचीबद्ध होने के लिए पूरे देश के तीन शहरों के नामों की सिफारिश की है और उनमें से दो (त्रिशूर और नीलांबुर) केरल से हैं।
कोविंद ने तीन स्नातकों को स्वर्ण पदक प्रदान किए।
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और राज्य के स्थानीय स्वशासन और आबकारी मंत्री एम वी गोविंदन भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
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