अयोध्या, छह दिसंबर बाबरी मस्जिद विध्वंस के 28 साल पूरे होने के मौके पर अयोध्या में पिछले वर्षों के जैसा माहौल नहीं था और हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों ने रविवार को किसी भी तरह के विशेष आयोजन से दूरी बनाई।
शहर में शांति बनाकर रखने के लिए भारी सुरक्षा बंदोबस्त किये गये थे।
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हालांकि, हिंदू संगठन ‘हिंदू महासभा’ ने सरयू नदी के किनारे ‘‘अयोध्या की तर्ज पर काशी और मथुरा के मंदिरों को मुक्त कराने’’ का संकल्प लिया।
प्रशासन ने भी नागरिकों से कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर किसी भी तरह का आयोजन नहीं करने को कहा था।
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इससे पहले 2018 तक विश्व हिंदू परिषद (विहिप) यहां ‘शौर्य दिवस’ मनाती थी, वहीं मुस्लिम विरोध स्वरूप ‘काला दिवस’ मनाते थे।
हालांकि, इस साल विहिप पहले ही घोषणा कर चुकी थी कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद विशेष तरीके से आयोजन की जरूरत नहीं है।
विहिप के वरिष्ठ नेता महंत कमल नयन दास ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘हमने अपने कार्यकर्ताओं को बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी को शौर्य दिवस के तौर पर नहीं मनाने का परामर्श जारी किया था।’’
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