देश की खबरें | भारत में ‘कुशल’ व्यापार श्रमिकों की कमी का एक कारण नकारात्मक धारणा है: सर्वेक्षण

नयी दिल्ली, 22 जुलाई एक वैश्विक कंपनी द्वारा किए गए सर्वेक्षण में पाया गया है कि 80 प्रतिशत भारतीय लोगों का मानना है कि देश में 'कुशल' व्यापार श्रमिकों की कमी का नकारात्मक आर्थिक प्रभाव हो सकता है, जीवन की समग्र गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नुकसान हो सकता है।

कुशल व्यापार श्रमिकों में इलेक्ट्रीशियन, बढ़ई, प्लंबर, स्टीमफिटर, पाइपफिटर, वेल्डर, भारी उपकरण ऑपरेटर और पेंटर शामिल हैं।

अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी ‘3एम’ द्वारा जारी ‘स्टेट ऑफ साइंस इंडेक्स (एसओएस)-2023’ में यह भी पाया गया कि 85 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि कुशल व्यापार श्रमिकों की कमी का एक कारण यह है कि बच्चों के माता-पिता नहीं चाहते कि इस क्षेत्र में अवसर तलाशें।

एसओएसआई-2023 में भारत में सर्वेक्षण के निष्कर्षों का जिक्र करते हुए कहा गया है, " 80 प्रतिशत का मानना है कि एक कुशल व्यापार श्रमिक होने को लेकर एक नकारात्मक धारणा है।”

एसओएसआई-2023 17 देशों का एक सर्वेक्षण है। यह पिछले साल सितंबर से दिसंबर के दौरान प्रत्येक देश में 1,000 लोगों के बीच किया गया था। इसमें विज्ञान के भविष्य पर रोशनी डाली गई है और यह एसटीईएम इक्विटी, कुशल व्यापार, स्थिरता, स्वास्थ्य और भविष्य के नवाचार से संबंधित भावनाओं को दर्शाता है।

सर्वे में कहा गया है, "80 प्रतिशत उत्तरदाताओं का कहना है कि अगर देश जल्द ही इस कमी का समाधान नहीं ढूंढ सका, तो नकारात्मक आर्थिक प्रभाव, जीवन की समग्र गुणवत्ता में गिरावट, सुरक्षा जोखिम, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नुकसान और आपूर्ति श्रृंखला में चुनौतियां पैदा होने जैसे परिणाम सामने आ सकते हैं।"

सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में 91 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि दुनिया की सबसे कमजोर आबादी के जीवन को बेहतर बनाने में विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है।

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