नयी दिल्ली, 21 दिसंबर मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने वैश्विक रेटिंग एजेंसियों की गणना-पद्धतियों को काफी हद तक विकासशील देशों के खिलाफ बताते हुए कहा है कि रेटिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए इसमें सुधार करने की जरूरत है।
नागेश्वरन ने वरिष्ठ सलाहकार राजीव मिश्रा के साथ लिखे एक लेख में वैश्विक रेटिंग एजेंसियों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सॉवरेन रेटिंग से जुड़ी प्रक्रियागत खामियों की वजह से वैश्विक दृष्टिकोण से अस्वीकार्य परिणाम आ जाते हैं।
सीईए कार्यालय की तरफ से तैयार किए गए एक सार-संक्षेप में इस लेख को शामिल किया गया है। हालांकि, इस लेख में व्यक्त विचार निजी हैं और वित्त मंत्रालय के विचारों को नहीं प्रदर्शित करते हैं।
नागेश्वरन ने कहा, ‘‘धारणाएं, मूल्य निर्णय, सीमित संख्या में विशेषज्ञों के विचार और सरकारी रेटिंग में शिथिल गणना-पद्धति वाले सर्वेक्षण जैसे अपारदर्शी गुणात्मक कारकों पर अत्यधिक निर्भरता का नतीजा वैश्विक दृष्टिकोण से अस्वीकार्य परिणामों के रूप में निकलता है।’’
इसके साथ ही दोनों लेखकों ने कहा है कि पिछले 15 वर्षों से भारत की रेटिंग 'बीबीबी-' ही बनी हुई है जबकि इस अवधि में भारत दुनिया की 12वीं बड़ी अर्थव्यवस्था से पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था तक का सफर तय कर चुका है।
इस लेख के मुताबिक, वैश्विक रेटिंग एजेंसियों के साख निर्धारण को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए गणना-पद्धतियों में सुधार करने की जरूरत है।
प्रेम
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