नयी दिल्ली, 18 दिसंबर संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) ने कहा है कि एनसीआर योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) को छह महीने के भीतर क्षेत्रीय योजना- 2041 को अंतिम रूप देना चाहिए और इसे अधिसूचित करना चाहिए।
पीएसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बोर्ड को उस कोष का पूरा उपयोग करना चाहिए जो राज्यों को ऋण देने के लिए है। समिति का कहना है कि यह पैसा सावधि जमा में निवेश के लिए नहीं है।
'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड के कामकाज' पर अपनी रिपोर्ट में पीएसी ने एनसीआर में प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र (एनसीजेड) के निर्धारण में देरी का भी उल्लेख किया।
लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की अध्यक्षता वाली पीएसी ने सरकार से सिफारिश की है कि राज्य के राजस्व रिकॉर्ड के सत्यापन के साथ-साथ विस्तृत जमीनी सच्चाई के आधार पर प्रत्येक भागीदार राज्य द्वारा एनसीजेड का निर्धारण समयबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए।
समिति ने सोमवार को लोकसभा में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में कहा कि एनसीआर में प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र के निर्धारण में देरी के लिए आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय और एनसीआरपीबी द्वारा जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है, "एनसीआरपीबी को मौजूदा भूमि उपयोग और प्रस्तावित भूमि उपयोग मानचित्र तैयार करने के लिए रिमोट सेंसिंग और 'जीआईएस' तकनीक का उपयोग करना चाहिए तथा क्षेत्रीय योजना के कार्यान्वयन की निगरानी करनी चाहिए, ताकि यह देखा जा सके कि विकास उक्त योजना के अनुरूप है या नहीं।"
इसमें कहा गया है कि एनसीआर योजना बोर्ड को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि क्षेत्रीय योजनाओं के बाद ही वित्तीय सहायता दी जाए।
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