देश की खबरें | राष्ट्रीय डेंगू दिवस: विशेषज्ञों ने मच्छर जनित बीमारी से निपटने के लिए प्रयास तेज करने को कहा

नयी दिल्ली,16 मई भारत में पिछले कुछ वर्षों में डेंगू के मामले तेजी से बढ़े हैं, ऐसे में विशेषज्ञों ने मच्छर जनित इस रोग से निपटने के लिए प्रयासों में तेजी लाने को कहा है।

देश में प्रति वर्ष 16 मई का दिन राष्ट्रीय डेंगू दिवस के तौर पर मनाया जाता है और इसका मकसद डेंगू के बारे में जागरूकता फैलाना है।

दुनिया के अन्य देशों के मुलाबले भारत में डेंगू के मामले अधिक हैं और इसके लिए शहरीकरण, यात्रा, व्यापार, जलवायु परिवर्तन, प्रभावी टीकों तथा दवाओं का अभाव जैसे कई कारक जिम्मेदार हैं।

लैंसेट पत्रिका में प्रकाशित हाल के आंकड़ों के अनुसार, भारत में जनवरी 2022 से अक्टूबर के बीच डेंगू के 1,10,473 मामले सामने आए, जो 2018 में सामने आए मामलों के बराबर हैं।

डेंगू के बढ़ते खतरे के बीच इसके उपचार के लिए टीके और दवाएं नहीं हैं।

डेंगू रोग विशेषज्ञ नीलिका मालाविज ने कहा,‘‘ डेंगू के लिए टीका निर्मित करने में एक मुख्य चुनौती यह है कि इस वायरस के चार स्वरूप हैं और ऐसा टीका बनाना मुश्किल है जो सभी स्वरूपों के लिए समान रूप से प्रभावी हो।’’

उन्होंने कहा,‘‘ तेजी से फैलने के दौरान वायरस के तेजी से रूप बदलने के साथ नए स्वरूप सामने आ सकते हैं और बीमारी अधिक तीव्रता से फैल सकती है।’’

डेंगू का पहला पंजीकृत टीका फ्रांस की दवा कंपनी सनोफी ने तैयार किया, लेकिन यह ‘सीरोटाइप 2’ के खिलाफ लगभग निष्प्रभावी रहा। इसी प्रकार से एक अन्य पंजीकृत टीका जापान की दवा कंपनी टकेडा ने तैयार किया था और यह ‘सीरोटाइप 3’ पर लगभग निष्प्रभावी साबित हुआ।

बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान में हाल में हुए एक अध्ययन में पता चला कि भारत में पिछले कुछ वर्षों में डेंगू के वायरस का ‘‘नाटकीय’’ ढंग से उभार हुआ है। यह देश में पाए जाने वाले स्वरूपों पर काबू पाने के लिए टीका विकासित करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया की लगभग आधी आबादी पर डेंगू का खतरा है।

केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित राजीव गांधी जैव-प्रौद्योगिकी केंद्र के वैज्ञानिक अरुण शंकरदास ने कहा, ‘‘संक्रमण के कुल मामलों के लगभग 34 प्रतिशत मामले भारत में होते हैं। डेंगू भारत के लगभग सभी राज्यों में स्थानिक है, और देश के विभिन्न हिस्सों में वायरस के सभी चार सीरोटाइप स्वरूपों से जुड़े मामले सामने आए हैं।’’

विशेषज्ञों का मानना है कि टीका डेंगू को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है लेकिन इस जानलेवा और तेजी से फैलने वाली बीमारी की रोकथाम और बचाव के लिए समन्वित प्रयास किए जाने की जरूरत है।

मालाविज ने कहा, ‘‘ डेंगू का टीका बनाने के जहां प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं मुख्यत: धन की कमी की वजह से डेंगू का उपचार विकसित करने की ओर किसी का ध्यान ही नहीं है क्योंकि डेंगू प्रारंभिक तौर पर कम तथा मध्यम आय वाले देशों को प्रभवित करता है।’’

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