देश की खबरें | राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने एम्स को नोटिस जारी किया
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने एक पूर्व रेसीडेंट डॉक्टर के आरोप पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को नोटिस जारी कर उससे कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। चिकित्सक का आरोप है कि उसने रेसीडेंट डॉक्टरों के हितों के बारे में सवाल उठाया था, इसलिए उसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित श्रेणी के पद से वंचित कर दिया गया।

एम्स से ही वृद्धावस्था चिकित्सा में एमडी हरजीत सिंह भट्टी ने आयोग से शिकायत की कि संस्थान में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित वृद्धावस्था चिकित्सा विभाग में सहायक प्रोफेसर के अनुबंध पर आधारित पद के लिए 28 अगस्त को साक्षात्कार देने वाले वह एकमात्र उम्मीदवार थे लेकिन उन्हें इस आधार पर चयन से वंचित कर दिया गया कि वह ‘‘उपयुक्त नहीं पाये गये।’’

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भट्टी ने आरोप लगाया, ‘‘जब मैंने पता करने का प्रयास किया तो मुझे बताया गया कि मेरा चयन इसलिए नहीं किया गया क्योंकि मैंने एम्स के आरडीए के अध्यक्ष के तौर पर रेसीडेंट डॉक्टरों का प्रतिनिधित्व किया था और उनके हितों से जुड़े सवाल उठाये थे।’’

आयोग के नोटिस में कहा गया है, ‘‘इसलिए आपसे इस नोटिस के मिलने के 15 दिनों के अंदर आरोपों/मामले से संबंधित तथ्यों एवं की गयी कार्रवाई का ब्योरा पेश करने का अनुरोध किया जाता है।’’

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नौ अक्टूबर को जारी किये गये नोटिस में कहा गया है, ‘‘कृपया यह ध्यान में रखिए कि यदि आयोग को निर्धारित अवधि के अंदर जवाब नहीं मिलता है तो वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत उसे प्राप्त दीवानी अदालत के अधिकारों का इस्तेमाल कर सकता है और वह आपको या किसी प्रतिनिधि को पेश होने को कह सकता है।’’

तत्काल एम्स ने इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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