देश की खबरें | नंदीग्राम की बलात्कार पीड़िताओं को अब भी न्याय का इंतजार

नंदीग्राम (पश्चिम बंगाल), 23 मार्च रुकमणि मंडल और शिखा यहां के एक छोटे से गांव की पड़ोसन हैं और जब से वे प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों में शामिल हुई हैं, एक दूसरे से नज़रें नहीं मिला पा रही हैं।

नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ चलाए गए आंदोलन के दौरान किए गए यौन उत्पीड़न के दर्द और इंसाफ के लिए कभी खत्म न होने वाले इंतजार ने दोनों को इतने सालों को तक बांधे रखा था।

बीते 14 साल में बंगाल के इस हिस्से में राजनीति काफी बदली है, लेकिन उन्हें इंसाफ नहीं मिला। महिलाएं इस बार अहम पड़ाव पर हैं और अपनी मांगों के पूरा होने की उम्मीद से दोनों विरोधी खेमों पर भरोसा जता रही हैं।

नंदीग्राम के इस गांव ने शक्तिशाली वाम मोर्चे के शासन की जड़ें उखाड़ दी थी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को सत्ता में ले आया था लेकिन क्षेत्र इस बार ‘दीदी और दादा’ में बंटा हुआ है। इस सीट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मुकाबला उनके पूर्व सहयोगी और भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से है। इस सीट पर एक अप्रैल को मतदान होना है।

नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ 10 महीने चले आंदोलन में 42 लोगों की मौत हुई थी जिनमें 14 मार्च 2007 को पुलिस की गोलीबारी में मारे गए 14 लोग भी शामिल थे। इसके अलावा 40 से अधिक महिलाओं का बलात्कार किया गया था।

राजनीतिक और सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकृत नंदीग्राम में बलात्कार पीड़िताएं सभी मतभेदों के बावजूद न्याय पाने का इंतजार कर रही हैं।

शिखा ने पीटीआई- से कहा, “ दीदी ने हमें सबकुछ दिया-- मुआवज़ा, नौकरी और अन्य लाभ। लेकिन हमें एक मलाल है कि हमें न्याय नहीं मिला। हम अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे देखना चाहते हैं।”

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