नयी दिल्ली, 24 जुलाई उपराष्ट्रपति एम वेकैंया नायडू ने स्कूलों और कॉलेजों में सामुदायिक सेवा को अनिवार्य करने का रविवार को सुझाव देते हुए युवाओं में "साझा करने और देखभाल करने" की भावना पैदा करने पर ज़ोर दिया।
इस्कॉन के संस्थापक की आत्मकथा ‘ सिंग, डांस एंड प्रे : द इंस्पीरेशनल स्टोरी ऑफ श्रील प्रभुपाद’ के विमोचन के मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए नायडू ने कहा कि भारतीय सभ्यता एकता, शांति और सामाजिक सद्भाव के सार्वभौमिक मूल्यों पर आधारित है और उन्होंने सदियों पुराने इन मूल्यों को संरक्षित करने एवं प्रसारित करने के लिए ‘आध्यात्मिक पुनर्जागरण’ का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने युवाओं से कहा कि वह महान संत और श्रील प्रभुपाद जैसे आध्यात्मिक नेताओं से प्ररेणा लें और बेहतर इंसान बनने के लिए अनुशासन, कड़ी मेहनत, संयम और सहानुभूति वाले गुणों को ग्रहण करें।
उपराष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, नायडू ने कहा, “आपको जाति, लिंग, धर्म और क्षेत्र की संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठना चाहिए और समाज में एकता, सद्भावना और शांति लाने के लिए काम करना चाहिए।”
श्रील प्रभुपाद को समतावादी विचार का अगुवा बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रभुपाद ने उन लोगों को गले लगाया जिन्हें समाज ने अलग कर दिया था और उनकी जिंदगियों में खुशी लेकर आए।
नायडू ने वैदिक ज्ञान और संस्कृति के प्रचार के जरिए सार्वभौमिक शांति और सद्भाव की दिशा में प्रभुपाद के अथक प्रयास की सराहना की।
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