कोहिमा, 25 जुलाई नगालैंड सरकार राज्य में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने के खिलाफ है और उसने भारत के विधि आयोग से राज्य को इससे छूट देने का आग्रह किया है। एक मंत्री ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
विधि आयोग ने 14 जून को एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर यूसीसी को लागू करने को लेकर जनता और धार्मिक संगठनों सहित विभिन्न हितधारकों से सुझाव मांगे गए थे। मंत्री ने कहा कि नगालैंड सरकार ने विधि आयोग से आग्रह किया है कि राज्य को यूसीसी लागू करने से छूट दी जाए।
नगालैंड के बिजली और संसदीय मामलों के मंत्री के.जी. केन्ये ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के नेतृत्व में एक मंत्रिस्तरीय टीम की हाल में दिल्ली यात्रा के दौरान आधिकारिक तौर पर 22वें विधि आयोग से यह आग्रह किया है।
केन्ये ने दावा किया कि टीम ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी और उन्होंने आश्वासन दिया है कि केंद्र ईसाइयों और कुछ आदिवासी राज्यों को यूसीसी के दायरे से छूट देने पर विचार कर रहा है।
उन्होंने कहा, “ हमारे लोगों ने यूसीसी लागू करने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है और वे ऐसे कानून के विचार के भी खिलाफ हैं और हर तरफ नाराजगी है। आदिवासी निकाय और नागरिक संस्थाओं ने खुले तौर पर घोषणा की है कि वे यूसीसी थोपे जाने को स्वीकार नहीं करेंगे।”
केन्ये ने कहा कि भारत के संविधान में अनुच्छेद 371 (ए) शामिल होने के साथ नगालैंड देश का 16वां राज्य बना था। यह अनुच्छेद नगाओं की धार्मिक या सामाजिक प्रथाओं, प्रथागत कानून और प्रक्रियाएं, नगा परंपरा कानून के अनुसार फैसलों से जुड़े दीवानी और फौजदारी न्याय प्रशासन और भूमि तथा संसाधनों के स्वामित्व और हस्तांतरण को संरक्षित करता है।
राज्य सरकार ने चार जुलाई को विधि आयोग को दिए पत्र में कहा था, “ हमारा यह मानना है कि ऐसा नजरिया हमारे पारंपरिक कानूनों, सामाजिक प्रथाओं और धार्मिक प्रथाओं के लिए सीधा खतरा है।”
मंत्री ने उम्मीद जताई कि केंद्र अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहेगा और संविधान के अनुच्छेद 371 (ए) को भी बरकरार रखेगा और नगालैंड को समान नागरिक संहिता लागू करने से छूट देगा।
यूसीसी शादी, तलाक और विरासत पर एक समान कानून होगा जो सभी भारतीय नागरिकों पर लागू होगा, भले ही उनका धर्म, जनजाति या स्थानीय परंपरा कुछ भी हो।
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