देश की खबरें | नागा ध्वज, संविधान लोगों की संप्रभुता से अलग नहीं हो सकते : एनएससीएन-आईएम

कोहिमा, 14 अगस्त एनएससीएन-आईएम के महासचिव थुइंगलेंग मुइवा ने सोमवार को कहा कि नगाओं के लिए अलग झंडा और संविधान विवादास्पद मुद्दे हैं जो शांति प्रक्रिया को बाधित करने वाले हैं और लोगों की संप्रभुता से इन्हें अलग नहीं किया जा सकता।

मुइवा ने कहा कि नगालैंड में स्थायी शांति लाने के लिए केंद्र और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम (इसाक-मुइवा) के बीच 2015 में नगाओं के अद्वितीय इतिहास और संप्रभुता को मान्यता देते हुए कार्यढांचा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।

उन्होंने कहा, “हमने अपने खून-पसीने से जो हासिल किया है, उसकी रक्षा हमें करनी चाहिए। सभी नगा क्षेत्रों के एकीकरण के मुद्दे पर, भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि यह नगाओं का वैध अधिकार है और इसलिए, इसे तदनुसार अंतिम रूप दिया जाएगा।”

मुइवा नगालैंड के वाणिज्यिक केंद्र दीमापुर से 30 किमी दूर हेब्रोन में अपने मुख्यालय में एनएससीएन-आईएम के ‘स्वतंत्रता दिवस’ समारोह के अवसर पर बोल रहे थे।

उन्होंने कहा, “नगा राष्ट्रीय प्रतिरोध आंदोलन नगाओं और उनकी भूमि के अंतर्निहित संप्रभु अधिकार की रक्षा के बारे में है। ... (एनएससीएन-आईएम ने) तीन अगस्त, 2015 को नगाओं के अद्वितीय इतिहास और संप्रभुता की मान्यता और दोनों संस्थाओं की साझा संप्रभुता और सह-अस्तित्व की नींव पर ऐतिहासिक कार्यढांचा समझौते पर हस्ताक्षर किए।”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में तीन अगस्त 2015 को मुइवा और नगा शांति वार्ता के लिए सरकारी वार्ताकार आर.एन. रवि द्वारा रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।

यह समझौता 18 वर्षों तक चली 80 से अधिक दौर की बातचीत के बाद हुआ जिसमें पहली सफलता 1997 में तब मिली जब नगालैंड में दशकों के विद्रोह के बाद युद्धविराम समझौते पर मुहर लगाई गई।

अंतिम समाधान हालांकि अभी तक सामने नहीं आया है, इसका मुख्य कारण एनएससीएन (आईएम) की अलग झंडे और संविधान की मांग को स्वीकार करने में सरकार की अनिच्छा है।

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