जरुरी जानकारी | सरसों, सोयाबीन और पामोलीन तेल कीमतों में सुधार, सस्ते आयात पर तिलहन किसानों की चिंता बरकार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को सरसों, सोयाबीन और पामोलीन तेल कीमतों में हल्का सुधार आया जबकि बाजार सूत्रों ने कहा कि सस्ते पाम तेलों के आयात से घरेलू खाद्य-तेल उद्योग और तिलहन उत्पादकों पर भारी दबाव बना हुआ है।
नयी दिल्ली, 21 अगस्त दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को सरसों, सोयाबीन और पामोलीन तेल कीमतों में हल्का सुधार आया जबकि बाजार सूत्रों ने कहा कि सस्ते पाम तेलों के आयात से घरेलू खाद्य-तेल उद्योग और तिलहन उत्पादकों पर भारी दबाव बना हुआ है।
सस्ते तेलों के आयात के बीच मांग प्रभावित होने से मूंगफली में गिरावट दर्ज हुई।
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अन्य तेल- तिलहनों के भाव अपरिवर्तित रुख के साथ बंद हुए।
बाजार सूत्रों का कहना है कि मंडी में कम भाव पर किसानों द्वारा बिकवाली नहीं करने से सरसों तेल तिलहन कीमतों में मामूली सुधार आया। सरसों की नयी फसल आने में सात आठ महीने की देर है। इस दौरान 37 से 40 लाख टन सरसों तेल की मांग निकलने का अनुमान है। इसी करण सहकारी संस्था नाफेड इस समय बहुत कम मात्रा में सरसों की बिक्री कर रही है।
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सूत्रों ने कहा कि सरसों में तेजी का एक और कारण विशेषकर सरसों कच्ची घानी के तेल की खपत का लगभग 25 प्रतिशत बढ़ना भी है। महामारी के बीच स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता बढ़ने से लोग सरसों कच्ची घानी की अधिक मांग कर रहे हैं।
गुजरात और महाराष्ट्र में किसानों और सहकारी संस्थ नाफेड के पास मूंगफली का पहले का काफी स्टॉक बचा हुआ है। चालू सत्र में इसकी बम्पर पैदावार है। देश में पाम तेल और सोयाबीन डीगम के आयात जरुरत से ज्यादा बढ़ने के कारण इस पैदावार को बाजार में खपाने की चिंता बढ़ रही है क्योंकि पामतेल के आगे इसकी लागत अधिक है।
बाजार सूत्रों ने कहा कि पिछले साल हर महीने सोयाबीन डीगम का आयात औसतन ढाई लाख टन था जो इस वर्ष लगभग पांच लाख टन मासिक हो गया है। इसी प्रकार सूरजमुखी का भी काफी स्टॉक बचा हुआ है और मंडी में इसकी बिक्री 4,000 रुपये क्विन्टल के भाव हो रही है जबकि इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,250 रुपये क्विन्टल है।
देश में ‘ब्लेंडिंग’ (सम्मिश्रण) की मांग बढ़ने से सोयाबीन डीगम की आवश्कता से अधिक मात्रा में आयात हो रहा है। इस स्थिति के मद्देनजर मूंगफली तेल तिलहन कीमतों में गिरावट आई।
सूत्रों ने कहा कि विदेशों से पाम तेल और सोयाबीन डीगम का भारी मात्रा में आयात हो रहा है। जुलाई में तो रिकॉर्ड मात्रा में आयात हुआ है और अगस्त में भी आयात और बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। देश में तेलों की मांग औसतन 12 लाख टन प्रति माह की है और सस्ते खाद्य तेलों का आयात 15 लाख टन से भी अधिक का हो रहा है। दूसरी ओर तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के सरकार के आह्वान पर किसानों ने मिहनत कर तिलहन की पैदावार बढ़ा दी है और इस वर्ष भारी पैदावार होने की संभावना है।
सस्ते आयातित तेलों के आगे अधिक लागत वाले महंगे देशी तेल को बाजार में खपाना एक ‘बड़ा सवाल’ बन गया है। किसानों को अपनी लागत निकालना मुश्किल हो रहा है।
स्थानीय तेल उद्योग के गठनों साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए), सौराष्ट्र तेल संघ जैसे प्रमुख खाद्य तेल संगठनों ने भी सरकार से सस्ते आयात पर अंकुश लगाने और केवल कच्चे पामतेल के आयात की अनुमति देने की मांग की है।
थोक तेल-तिलहन बाजार के बंद भाव शनिवार को इस प्रकार रहे- (भाव- रुपये प्रति क्विंटल)
सरसों तिलहन - 5,085- 5,135 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये।
मूंगफली दाना - 4,550- 4,600 रुपये।
वनस्पति घी- 965 - 1,070 रुपये प्रति टिन।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात)- 11,920 रुपये।
मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 1,755- 1,815 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,280 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,585 - 1,725 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,695 - 1,815 रुपये प्रति टिन।
तिल मिल डिलिवरी तेल- 11,000 - 15,000 रुपये।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 9,250 रुपये।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,100 रुपये।
सोयाबीन तेल डीगम- 8,220 रुपये।
सीपीओ एक्स-कांडला-7,450 से 7,500 रुपये।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,180 रुपये।
पामोलीन आरबीडी दिल्ली- 8,950 रुपये।
पामोलीन कांडला- 8,150 रुपये (बिना जीएसटी के)।
सोयाबीन तिलहन डिलिवरी भाव 3,605- 3,630 लूज में 3,340 -- 3,405 रुपये।
मक्का खल (सरिस्का) - 3,500 रुपये
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(The above story first appeared on LatestLY on Aug 22, 2020 06:08 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

