साउथम्पटन, 23 मई (द कन्वरसेशन) शोधकर्ताओं ने पहली बार ‘‘एमआरआई’’ तस्वीरों को वाक्यों में बदलने के लिए ‘‘जीपीटी1’’ का इस्तेमाल किया है। यह एआई (कृत्रिम मेधा) ‘‘चैटबॉक्स चैटजीपीटी’’ का पूर्ववर्ती है। इस पूरी कवायद का मकसद यह जानना है कि व्यक्ति क्या सोच रहा है।
इस नए सुराग ने ऑस्टिन में टेक्सास विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं को किसी के विचारों को लिखित संदेशों की भांति ‘पढ़ने’ का अवसर दिया।
हालांकि इससे निजता, विचारों की स्वतंत्रता यहां तक की बिना किसी बाधा के स्वप्न देखने की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं पैदा हुई हैं। हमारे कानून मष्तिष्क पढ़ने से जुड़ी प्रौद्योगिकियों के व्यापक वाणिज्यिक इस्तेमाल से निपटने में सक्षम नहीं हैं क्योंकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारे विचारों को सुरक्षित करने की सीमा तक नहीं आती।
टेक्सास अध्ययन में भाग लेने वालों को ‘‘एमआरआई’’ मशीन के अंदर 16 घंटे तक ‘‘ऑडियो बुक’’ को सुनने के लिए कहा गया। ठीक उसी वक्त एक कम्प्यूटर ने उनके मस्तिष्क की गतिविधियों को ‘‘एमआरआई’’ के साथ जोड़ना सीखा। एक बार दक्ष हो जाने के बाद ‘‘डिकोडर’’ ने किसी के विचारों को लिखित संदेश के तौर पर पेश किया।
यहां इस बात का उदाहरण है कि कोई क्या सुन रहा था(ऑडियोबुक से)
मैं गद्दे से उठा और शयनकक्ष में खिड़की के कांच के पास आया, इस उम्मीद से कि वे आंखे दिखाई देंगी जो मुझे घूर रही हैं, लेकिन मुझे वहां केवल अंधेरा दिखा।
कम्प्यूटर ने इस संबंध में मस्तिष्क की गतिविधियों से जो ‘पढ़ा’ - मैंने खिड़की की ओर बढ़ना शुरू किया और कांच को खोला। मैं पंजों के बल खड़ा हुआ और बाहर देखा, मुझे बाहर कुछ नहीं दिखाई दिया, मैंने फिर देखा मुझे फिर कुछ दिखाई नहीं दिया।
शोधकर्ताओं ने हालांकि आगाह किया कि आगे चलकर मस्तिष्क अध्ययन प्रौद्योगिकी किसी दिन लोगों की मर्जी के बिना भी उन पर लागू की जा सकेगी।
भविष्य में शोधकर्ता प्रशिक्षण तथा ‘‘डिकोडिंग’’ की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। जहां एक मशीन को यह प्रशिक्षित करने में 16 घंटे लगे कि कोई व्यक्ति क्या सोच रहा है, भविष्य में इसमें काफी कमी आएगी। जैसा हमने अन्य एआई प्रक्रियाओं में देखा है, ‘‘डिकोडर’’ वक्त के साथ और सटीक हो जाएंगे।
कानूनी और नैतिक असर
डेटा गोपनीयता कानून वर्तमान में किसी विचार को डेटा के तौर पर नहीं मानता। हमें नए कानूनों की जरूरत है जो अपराध के ख्यालों को उपजने नहीं दे, यहां तक कि किसी दिन शायद विचारों को प्रतिरोपित करने तथा उन्हें अपने मुताबिक करने से रोके। विचारों को पढ़ने से लेकर उन्हें दूसरे में प्रतिरोपित करने तक में लंबा वक्त लगेगा लेकिन इन पर निगरानी की जरूरत है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY